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दो सौ साल पुरानी रिवायत टूटी, ताजिये नहीं हुए दफन

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मेरठ। कोरोना काल में जहां माहे रमजान, ईद और बकरीद पर लोग घरों में रहने को मजबूर हो गए। वहीं, रविवार को मोहर्रम की 10 तारीख यौमे आशूरा पर ताजिये दफन नहीं हो पाए। मोहर्रम कमेटी के सदस्यों ने बताया कि इससे करीब दो सौ साल पुरानी रिवायत टूट गई। जिसमें यौमे आशूरा पर मातमी और कदीमी जुलूस नहीं होने के साथ ताजिये दफन नहीं हो पाए।
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मोहर्रम की 10 तारीख को हर साल सड़कों पर भारी भीड़ दिखती थी, वहां लॉकडाउन के चलते सन्नाटा पसरा। इस्लामिक कैलेंडर में मोहर्रम पहला महीना है। जिसकी पहली तारीख से ही शिया मुस्लिम हजरत इमाम हुसैन और 72 शौहदाये कर्बला की याद में गमगीन हो जाते हैं। पहली तारीख से इमामबारगाहों और अजाखानों में मजलिसों का दौर शुरू होकर मोहर्रम की 10 तारीख यानी यौमे आशूरा पर खत्म होता है। मेरठ मोहर्रम कमेटी के मीडिया प्रभारी सैयद अली हैदर रिजवी ने बताया कि इस बार हजरत इमाम हुसैन के चाहने वाले मायूस हुए। लखनऊ में नवाब सिराजुद्दौला ने करीब दो साल पूर्व इमामबारगाह गुफरामाब की नींव रखी थी। इसके बाद से ही ताजदारी और अजादारी का सिलसिला शुरू हुआ। कोरोना ने हुसैनी सोगवारों के मातम और सोग मनाने में खलल डाल दिया। हालांकि इससे सोगवारों की हजरत हुसैन की मोहब्बत में कोई कमी नहीं आई, सभी ने अपने अपने तरीके से शौहदाये कर्बला की याद में आंसू बहाए। एक बात का अफसोस जरूर है कि दो सौ वर्षों से चली आ रही ताजिये दफनाने की रिवायत रविवार को टूट गई।
बताया ताजिये दफनाने पर रोक के कारण इस बार इमामबारगाहों और अजाखानों में ताजिये नहीं गए। इससे दफनाने का सिलसिला भी रुक गया। इमामबारगाहों और अजाखानों में हुई मजलिस शास्त्रीनगर सेक्टर-4 स्थित शाहजलाल अजाखाने, घंटाघर स्थित छोटी कर्बला, जैदीनगर सोसाइटी स्थित पंजेतनी, जैदी फार्म इमामबारगाह इश्तियाक हुसैन में ताजिये बरामद नहीं हो पाए। चंद लोगों ने ऑनलाइन और अन्य माध्यमों से मजलिस का आयोजन किया। इन सभी स्थानों पर जंजीरी और कदीमी जुलूस होते थे। जिसमें घंटाघर पर सभी सोगवार एकत्रित होकर बड़े जुलूस में तब्दील हो जाते थे। मोहर्रम कमेटी की अपील पर सुबह नौ बजे शिया सोगवारों ने छतों पर इबादत की। मोहर्रम कमेटी के संयोजक अलहाज सैयद शाह अब्बास सफ़वी ने बताया कोरोना काल में नियम का पालन करना हर भारतीय का फर्ज है। शिया मुस्लिमों ने मुहर्रम की 10 तारीख तक नियमों का पालन करते हुए हजरत इमाम हुसैन को याद किया।
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