मेरठ। शहर में बीएसएनएल के लगभग 200 कर्मचारी पिछले सप्ताह पेश हुई स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति योजन (वीआरएस) का फायदा उठाने की तैयारी कर चुके हैं। देश में बीएसएनएल कर्मचारियों की संख्या 1.5 लाख है। मेरठ में लगभग 450 कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत है। हालांकि कर्मचारी यूनियन इसे घाटे का सौदा बता रही हैं।
बीएसएनएल एंप्लाइज यूनियन के जिला सचिव नरेश पाल ने बताया कि बहुत से कर्मचारियों की सात से आठ साल की सेवाएं शेष हैं, लेकिन शोषण के डर से कर्मचारी वीआरएस लेने के लिए मजबूर हैं। एक तरफ पैसा मिलने का प्रलोभन दिया जा रहा है। वहीं, अगर कर्मचारी नौकरी करते तो उन्हें इंक्रीमेंट, प्रमोशन और अन्य सुविधाएं प्राप्त होंगी। यह स्कीम 50 साल से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों के लिए है। सचिव नरेश पाल ने कहा कि यह बीएसएनएल में आउट सोर्सिंग को बढ़ाने का प्रयास मात्र है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए दो माह का वेतन तक रोका गया है। सितंबर का वेतन दीपावली से चार दिन पहले दिया गया। राजभाषा अधिकारी सतेंद्र रावत ने बताया कर्मचारी वीआरएस के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अब जितने समय की नौकरी मिली है उसका पैसा मिल जाएगा। साथ ही पेंशन भी मिलेगी। कम स्टॉफ होने के कारण वर्क लोड बहुत अधिक बढ़ जाएगा। उन्होंने बताया कि उनके साथ चंद्रमोहन शर्मा, उपेंद्र शर्मा, अनूप सेक्सैना आदि लोग भी वीआरएस ले रहे हैं।