मेरठ में 20 से 50 फीसदी तक अवैध निर्माण हो सकता है वैध
मेरठ। जिले में अवैध निर्माणों को वैध करने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ी राहत दी है। शनिवार को शमन शुल्क योजना-2020 को मंजूरी दे दी गई है। इससे हजारों अवैध निर्माणों को नियमित करने का मौका मिल सकेगा। करीब दो महीने पहले विकास प्राधिकरणों से प्रस्तावित शमन शुल्क योजना-2020 को लागू करने के लिए सुझाव मांगे गए थे। अभी तक 10 प्रतिशत हिस्से को ही शमन शुल्क देकर वैध किया जाता था लेकिन प्रस्तावित ड्राफ्ट में 20 से 50 प्रतिशत अवैध हिस्से को वैध करने का प्रस्ताव था। हालांकि, इस योजना को मंजूरी मिलने के बाद यह साफ है कि बिना नक्शा पास कराए अवैध निर्माण अब वैध हो सकेंगे। इसके लिए जल्द आवास विभाग गाइड लाइंस जारी करेगा।
इस ड्राफ्ट में अवैध निर्माण के शमन की अधिकतम सीमा को अलग-अलग रखा गया है। इसमें 300 वर्ग मीटर के भवनों का 20 प्रतिशत अतिरिक्त निर्माण शमनीय होगा। वहीं, फ़्रंट सेट बैक में अधिकतम 50 प्रतिशत निर्माण शमन का प्रस्ताव था। इसके अलावा 500 वर्ग मीटर से अधिक या ग्रुप हाउसिंग जिसमें आठ से अधिक फ्लैट होंगे, उन्हें शुल्क देकर शमन योजना के तहत वैध कराने का भी प्रस्ताव है।
यह भी जान लीजिए
कुल निर्मित क्षेत्रफल में अनुमन्य अधिकतम 10 प्रतिशत के स्थान पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त निर्माण शमनीय का प्रस्ताव है। ग्रुप हाउसिंग, व्यावसायिक कार्यालय, संस्थागत और अन्य बहुमंजिले निर्माण में अतिरिक्त 15 प्रतिशत निर्माण को शमन कराया जा सकेगा। वहीं, निजी स्वामित्व की जमीन पर बने बेसमेंट का भी शमन कराया जा सकेगा। पार्किंग स्थल पर हुए निर्माण के बदले 100 मीटर के दायरे में पार्किंग की व्यवस्था करने पर वैध की सुविधा दी जाएगी।
ये अवैध निर्माण पात्र नहीं होंगे
इस योजना में भी सभी को फायदा नहीं मिलेगा। इसमें सरकारी भूमि पर कब्जा कर किए गए अवैध निर्माण को वैध नहीं किया जाएगा। महायोजना में चिन्हित हुई जमीन, तालाब, नदी की जमीन पर किया गया निर्माण, अवैध कॉलोनियां अथवा उनके अंतर्गत किए गए निर्माण आदि इस योजना में मान्य नहीं होंगे।
प्रक्रिया, फीस आसान होनी चाहिए
भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि लगभग डेढ़ वर्ष से विचाराधीन शमन नीति को प्रदेश सरकार ने स्वीकृत कर लिया है। मैंने 23 जून को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर स्वीकृत करने का आग्रह किया था। अब इसकी नियमावली, फीस प्रक्रिया आसान होनी चाहिए।
अभी नियमावली की जानकारी नहीं
एमडीए उपाध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय का कहना है कि अभी हमें नियमावली की कोई जानकारी नहीं है। शासन से निर्देश मिलने के बाद ही इसे लागू करेंगे।