आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में मेरठ मंडल के 20 और अस्पताल दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इन्हें पैनल से हटाया जा सकता है। इसके लिए चार सदस्य विजिलेंस टीम का गठन किया गया है, जो सोमवार से पड़ताल शुरू करेगी। ये अस्पताल मेरठ के अलावा, हापुड़, बुलंदशहर, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर जिलों के हैं।
इससे पहले पिछले माह इलाज न करने पर दो अस्पतालों के नाम हटा दिए गए थे। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने यह तय किया है कि जो अस्पताल लाभार्थियों का इलाज नहीं कर रहे हैं, उनका नाम पैनल से हटाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग लगातार योजना से जुड़े अस्पतालों की पड़ताल कर रहा है। मानकों के अलावा उनमें कितने मरीजों को इलाज मिला यह भी देखा जा रहा है।
विजिलेंस टीम के प्रभारी डॉ. पीके जैन ने बताया कि विभाग के पास 20 अस्पतालों के खिलाफ सूचनाएं हैं कि उनके यहां आयुष्मान के के नियमों का अनुपालन नहीं हो रहा है।
इनमें कई अस्पताल मेरठ जिले के हैं और बाकी दूसरे जिलों के। यह तो पड़ताल के बाद ही पता चल पाएगा कि नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
ये हैं मानक
- अस्पताल में आयुष्मान के मरीजों का इलाज किया जाना जरूरी है।
- कम से कम 10 बेड का अस्पताल होना चाहिए।
- अस्पताल में बेड के मुताबिक जगह सपोर्ट स्टाफ होना चाहिए।
- दो डॉक्टर और तीन नर्स की उपलब्धता हो।
- 24 घंटे के लिए हो दो डॉक्टर और तीन नर्स की उपलब्धता रहे।
- 24 घंटे के लिए वार्ड ब्वाय और अन्य स्टाफ भी होना चाहिए।
- एक्सरे, पैथोलॉजी, सीटी स्कैन आदि सुविधाएं हों, ट्रेंड स्टाफ हो।
- सर्जिकल मेडिकल सेवाएं देने के लिए अस्पताल सक्षम हो।
- पोस्ट सिजेरियन केयर यूनिट व आईसीयू, वेंटीलेटर की सुविधा हो
- 24 घंटे एंबुलेंस सेवा होनी चाहिए
40 अस्पतालों के आवेदन किए जा चुके निरस्त
इस योजना के तहत आवेदन करने वाले 40 अस्पतालों-नर्सिंग होम के आवेदन पहले ही निरस्त किए जा चुके हैं, जबकि इसमें शामिल दो अस्पतालों ने अपने अपने नाम वापस ले लिए थे।
वहीं, प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट आयुष्मान योजना में जनपद के मेरठ में 102 अस्पतालों-नर्सिंग होम ने आवेदन किए थे। स्वास्थ्य विभाग में 243 अस्पताल-नर्सिंग होम पंजीकृत हैं, जिनमें से 141 अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने इस योजना में शामिल होना ही मुनासिब नहीं समझा।