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Meerut News: जिले में विकास कार्य कराने में फिसड्डी 20 विभाग, 80 करोड़ वापस

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मेरठ। जनपद में विकास कार्य कराने में 20 सरकारी विभाग फिसड्डी साबित हो गए हैं। शासन द्वारा भेजी धनराशि भी खर्च नहीं कर सके। जिसके चलते वित्तीय वर्ष 31 मार्च बीत गया और एक अप्रैल 2025 को 80 करोड़ रुपया वापस हो गया। हालांकि, कई विभाग ने अगले वित्तीय में अतिरिक्त काम करने की बात कही है।
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विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों, कर्मचारियों के बकाया वेतन एरियर या फिर अन्य विकास के नाम पर आया पैसा एक अप्रैल को वापस कर दिया गया है। मंगलवार रात तक कचहरी स्थित मुख्य कोषागार कार्यालय में काम होता रहा। समय पर 20 विभाग विकास कार्य नहीं करा पाए, जिस कारण उन्होंने शासन से अवमुक्त हुई 80 करोड़ की धनराशि वापस कर दी। शासन द्वारा विकास कार्यों के लिए अवमुक्त किए गए धन का समयावधि में प्रयोग नहीं होने पर विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। उनका कहना है कि सड़कों के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को धनराशि आवंटित हुई पर निर्माण कार्य नहीं होने के कारण इस विभाग ने 30 करोड़ शासन को वापस कर दिए। लाला लाजपत राय मेडिकल काॅलेज ने शासन को 14 करोड़ रुपये वापस कर दिए हैं। उन्होंने इस बाबत डीएम को पत्र भेजकर इस मामले की जांच कराने का आग्रह किया है। जानबूझकर विकास कार्य में किसी विभाग ने शासन द्वारा आवंटित धन का प्रयोग नहीं किया है तो संबंधित विभागीय अधिकारी के खिलाफ शासन को कार्रवाई की संस्तुति की जाए।


ऐसे हुआ विभागों का पैसा वापस
लोक निर्माण विभाग का 30 करोड़, मेडिकल काॅलेज का 14 करोड़, सीएमओ कार्यालय से सात करोड़ सात लाख, खाद्य नियंत्रण विभाग के 6 करोड़ 3 लाख, पशुपालन विभाग के 3.43 करोड़, खेल विभाग के 2.45 करोड़ आदि विभागों का पैसा वापस हो गया है। पिछले दो दिनों के अंदर उद्योग विभाग को 1.26 करोड़, पशुपालन विभाग को 1.18 करोड़, मेडिकल काॅलेज को 3.35 करोड़, लोक निर्माण विभाग को 3.35 करोड़, सिंचाई विभाग को 3.50 करोड़, पुलिस विभाग को 44 लाख रुपये मिले थे। नगर निगम का भी 68 करोड़ रुपया मिलना बताया गया है। दो दिन के अंदर यह विभाग इस रकम को खर्च नहीं कर पाए। इसलिए यह पैसा भी वापस हो गया है।
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अब नए सिरे से जारी होगी राशि
सीडीओ नूपुर गोयल ने बताया कि विभागीय अधिकारियों ने धनराशि खर्च नहीं की है। करीब 20 विभागों की 80 करोड़ धनराशि वापस हो गई है। इस प्रकरण में जांच कराई जा रही है कि विभागीय अधिकारियों ने ऐसा क्यों किया। अब नए सिरे से हर विभाग अपने प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे। यह राशि विकास और योजनाओं के नाम पर वापस होगी। बताया कि लोनिवि को सड़कों का टेंडर प्रक्रिया में है। अभी 30 करोड़ आवंटित है।


बजट कब आया और विभागों द्वारा क्यों खर्च नहीं किया गया। इसकी जांच कराई जा रही है। विभाग से रिपोर्ट मांगी जा रही है। विकास कार्यों के लिए योजना बनाकर काम करेंगे। लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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वीके सिंह, डीएम
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