घने जंगल में खेतों के बीच जिस स्थान पर धर्मेंद्र ने आलीशान फार्म हाउस का निर्माण किया है, वहां दिन में भी अकेले जाने में डर लगता है। आसपास के खेतों में किसानों ने जंगली जानवरों से फसल के बचाव के लिए तारबंदी कर रखी है। ऐसे में लोग सहसा ये सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इस निर्माण के पीछे मोटी धनराशि खर्च करने का मकसद क्या है?
लोगों का कहना है कि यदि जमीन खरीद कर ही बनाना था तो सड़क के आसपास भी जमीन मिल सकती थी। लोगों का कहना है कि शायद कुछ छिपाने के लिए ही जंगल के बीच में फार्म हाउस का निर्माण किया गया है। पूर्व विधायक और भाजपा नेता गोपाल काली प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगा चुके हैं वहां सारे अवैध काम होते थे। फार्म हाउस के आसपास पड़ी बिसलेरी आदि की बोतलें इस बात की गवाही दे रहीं हैं कि वहां जब-तब कुछ चुनिंदा लोग पार्टियां कर जंगल में मंगल करते थे।
स्थानीय लोग मानते हैं कि धर्मेंद्र को अपने राजनीतिक आका पर इतना विश्वास था कि उसके रहते कोई भी उन्हें मेरठ जनपद से हिला नहीं पाएगा। इसी विश्वास के चलते उन्होंने जगंल के मध्य ऐशगाह का निर्माण कर डाला था।
सोलर लाइट किसने उपलब्ध कराईं
फार्म हाउस में दो सोलर लाइट लगी हैं। इस तरह की सोलर लाइट को मुख्यत: नगर पंचायत या ग्राम पंचायत द्वारा ही खरीदा जाता है। दोनों सोलर लाइट किसने उपलब्ध कराई हैं? आईजी के निर्देश पर जांच कर रहे एसपी देहात और एसएसपी के निर्देश पर जांच कर रहे सीओ मवाना के लिए यह जांच का विषय है। दोनों ने अपने-अपने तरीके से जांच शुरू कर दी है। हस्तिनापुर नगर पंचायत के चेयरमैन अरुण कुमार का कहना है कि नगर पंचायत की ओर से सोलर लाइट नहीं दी गई है। नगर पंचायत की ओर से खरीदी गई सोलर लाइट का पूरा हिसाब उनके पास है।
जेनरेटर से हो रही थी बिजली आपूर्ति
फार्म हाउस तक बिजली लाइन नहीं होने के कारण यहां एक बड़ा साइलेंट जेनरेटर भी लगाया गया है। जेनरेटर की क्षमता इतनी है कि उससे कई एसी भी बिना किसी असुविधा के चल सकते हैं। फार्म हाउस की छत पर व्यायाम करने के लिए वेट लिफ्टिंग का सामान रखा हुआ है।
ताला बंद करने के बाद कागजात जलाए
मंगलवार को अमर उजाला में धर्मेंद्र के फार्म हाउस का खुलासा होने के बाद वहां तैनात हस्तिनापुर थाने के सिपाही और होमगार्ड को आनन-फानन में थाने बूुला लिया गया था। फार्म हाउस में ताला बंद कर दिया गया था। बुधवार को फार्म हाउस के बाहर कुछ जले हुए कागज देखे गए। ऐसा लग रहा है कि जांच शुरू होने से पहले ही कुछ सुबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया गया है।