शासन में लंबित हिंदी भवन पुनर्निर्माण का प्रस्ताव
मेरठ। पटेल नगर स्थित पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी भवन के पुनरोद्धार की कार्ययोजना पिछले साल अक्तूबर में बननी शुरू हो गई थी। सिविल डिफेंस कार्यालय शिफ्ट होने के साथ इस परिसर में नया निर्माण कराने के लिए शासन से अनुदान प्राप्त करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। इसी की स्वीकृति की उम्मीद में हिंदी भवन ने नए निर्माण का नक्शा तैयार कराकर स्वीकृति के लिए एमडीए में भी जमा किया था।
हिंदी भवन की बिल्डिंग अक्तूबर 2018 में गिरा दी गई थी। करीब 2000 वर्ग मीटर के खाली भूखंड में निर्माण के लिए सरकारी अनुदान प्राप्त करने के लिए समिति सदस्यों ने जब मंथन किया तो पता चला कि यदि कोई ऑडिटोरियम का निर्माण कराया जाए तो शासन के सांस्कृतिक विभाग से अनुदान प्राप्त हो सकता है। जिसके तहत समिति सदस्यों ने भूतल पर 500 सीटों का ऑडिटोरियम और उसके ऊपर हिंदी भवन की लाइब्रेरी आदि निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर सांस्कृतिक विभाग को भेज दिया। समिति द्वारा नक्शा तैयार कराकर एमडीए में स्वीकृति हेतु जमा करा दिया गया। शासन में हिंदी भवन समिति का प्रस्ताव चुनाव आचार संहिता के तहत अभी लंबित है। जबकि एमडीए ने तकनीकी खामियां निकालते हुए नक्शा स्वीकृति पर अड़ंगा लगा दिया है। जिसके लिए समिति के लोग प्रयास कर रहे हैं।
स्वयं के स्तर पर भी निर्माण की है तैयारी
हिंदी भवन समिति में शहर के प्रतिष्ठित लोग जुड़े हैं। उनका कहना है कि नक्शा स्वीकृत होते ही शिलान्यास करा दिया जाएगा। इसके बाद शहर के दानदाताओं और हिंदी प्रेमियों की मदद से इस भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी। लेकिन इससे पहले चुनाव आचार संहिता हटते ही शासन स्तर पर अनुदान प्राप्त करने की पैरवी की जाएगी।
अन्य लोगों के कब्जे भी नहीं हटे
हिंदी भवन के गेट के पास कुछ कबाड़ियों द्वारा भी कब्जा किया हुआ है। जिसे लेकर कई बार पुलिस-प्रशासन से शिकायत हो चुकी है। लेकिन माहौल का हवाला देते हुए प्रशासन लगातार इस तरफ भी लापरवाह बना हुआ है।
अब आयी गंभीरता
समिति सूत्रों की मानें तो इस मामले में समिति भी उदासीन बनी हुई थी। लेकिन अमर उजाला द्वारा इसे मुद्दा बनाते ही समिति भी गंभीरता से सक्रिय हो गई है। इस मामले में अब बुधवार को समिति की बैठक प्रस्तावित की गई है। जिसमें हिंदी भवन परिसर को कब्जा मुक्त कराने के साथ ही निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाने पर विचार होगा।