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गोपी पारिया की हत्या केे बदले फिर बहाया खून

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गोपी पारिया की हत्या केे बदले फिर बहाया खून
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पुलिस-प्रशासन के लिए शोभापुर की घटना बनी चुनौती
दो अप्रैल की घटना के बाद बिगड़े थे शोभापुर के हालात
कई नेता भी गांव में कर चुके हैं बैठक, प्रशासन के लिए बनी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। दो अप्रैल को एससीएसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में मेरठ समेत कई जनपदों में बवाल हुआ था। सबसे ज्यादा हालात भी कंकरखेड़ा और शोभापुर में बिगड़े थे। जहां शोभापुर पुलिस चौकी को भी आग के हवाले कर दिया गया था।
इस बवाल को लेकर दो दिन बाद ही चार अप्रैल 2018 को समाजवादी पार्टी के नेता मनोज गुर्जर ने अपने गांव शोभापुर में बसपा कार्यकर्ता गोपी पारिया की हत्या कर दी थी। जिसके बाद अनुसूचित जाति के युवकों ने गोपी पारिया की हत्या का बदला लेने का ऐलान किया था। जिसके बाद एक माह तक गांव में तनाव के चलते पुलिस और पीएसी तैनात रही। दोनों ही जाति के लोगों के बीच इस तरह तनातनी हुई कि कई बड़े नेताओं को भी माहौल को शांत कराने के लिए गांव में पहुंचना पड़ा। गोपी पारिया की हत्या के बदले में गोपी के भाई मोहित पारिया समेत कई लोगों ने गुर्जर समाज के आशीष गुर्जर की 15 दिसंबर हत्या कर दी थी उसके बाद से शोभापुर गांव में तनाव की स्थिति बन गई थी। दोनों बिरादरी के बीच जातीय संघर्ष को देखते हुए शोभापुर में कई बार शांति समिति की बैठक भी हुई। इसके बावजूद भी गांव में तनातनी बनती चली गई। इस मामले में पुलिस ने गंभीरता नहीं बरती। जिसका नतीजा अब देखने को मिल रहा है। दलित समाज के युवकों ने गोपी पारिया की हत्या के बदले में अब मनोज गुर्जर के सगे भतीजे मोनू की हत्या कर शव जला दिया गया। पुलिस ने घर से बुलाकर ले जाने वाले मुख्य आरोपी ईशू को देर रात गिरफ्तार कर लिया है।
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चार भाइयों में बड़ा था था मोनू
मोनू गुर्जर की मौत के बाद परिवार के लोगों का रो रोकर बुरा हाल है। मोनू के पिता मांगेराम किसान हैं। मोनू चार भाइयों में सबसे बड़ा था। छोटे भाई प्रिंस, कृष्ण और गौरी का भी बुरा हाल है। मांगेराम ने पुलिस के सामने बिलखते हुए कहा कि 20 मार्च को होली के दिन गांव का ही अनुसूचित जाति का युवक ईशू घर से बुलाकर ले गया था। एक पूर्व पार्षद के घर पर लेकर पहुंचा। उसके बाद से उनका बेटा घर नहीं लौटा। परिजनों ने काफी तलाश की लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। परिजनों ने कंकरखेड़ा थाना में शिकायत भी की थी परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने ईशू की तलाश में उसके घर दबिश दी तो वह गायब मिला था। मोनू के पिता का कहना है कि उनकी कोई रंजिश नहीं थी। लेकिन अनुसूचित जाति के लोगों ने उनके घर को बर्बाद कर दिया।
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