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पुराना हुआ खंडहर, बना रहे नया दवाई घर

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पुराना हुआ खंडहर, बना रहे नया ‘दवा घर’
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मेरठ। स्वास्थ्य विभाग का पुराना ड्रग्स वेयर हाउस यानि दवा गोदाम तो खंडहर बना हुआ है। करोड़ों रुपये लगाए गए, मगर उसका कोई इस्तेमाल नहीं किया गया। अब नया ‘दवा घर’ यानि इसी तरह का दवाइयों का गोदाम बनाए जाने की कवायद चल रही है। इसके लिए तीन बार जगह बदली जा चुकी है। फिलहाल मवाना में बंद पड़े महिला अस्पताल की जमीन को चिह्नित किया गया है।
अभी इसके बजट के बारे में फाइनल नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि यह दवा गोदाम करोड़ों रुपये की लागत से बनेगा। नए दवा गोदाम के लिए पहले भूड़भराल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर जगह चिह्नित की गई थी। जगह कम होने केकारण बाद में कंकरखेड़ा सीएचसी में जगह चिह्नित कर रिपोर्ट शासन को भेजी गई। यह जमीन भी कम पड़ गई। दरअसल, शासन ने पांच हजार स्क्वायर फीट जमीन चिह्नित करने के लिए कहा है। मवाना में बंद पड़े महिला अस्पताल की जिस जमीन को देखा गया है, उस पर नगर पालिका ने अड़ंगा लगा दिया है। उनका कहना है कि यह जमीन उनकी है। उन्होंने कोर्ट में केस डाला हुआ है। फिलहाल शासन से स्वास्थ्य विभाग को आने वाली दवाइयां मेडिकल कॉलेज स्थित अपर निदेशक कार्यालय, जिला अस्पताल, सीएमओ कार्यालय आदि जगह रखी जा रही हैं।
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16 साल पहले बनाया गया, नहीं किया इस्तेमाल
मेरठ-दिल्ली रोड पर करीब एक किलोमीटर अंदर राजकीय कुष्ठ आश्रम के सामने करीब एक बीघा जमीन में 2001-02 में करोड़ों खर्च दवा गोदाम बनाया गया था। इसमें दवाइयों का रखरखाव किया जाना था। मेरठ केअलावा यहां गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और बागपत जिले की दवाइयां भी रखी जानी थी। इस दवा गोदाम का अगर जीर्णोद्धार हो जाए तो इसका फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है। मुख्य मार्ग से पुराने दवा गोदाम तक जाने वाली सड़क खराब है। स्वास्थ्य विभाग केअफसरों द्वारा यही कारण बताया जाता है कि दवा गोदाम चलाया नहीं जा रहा है। यहां की सड़क बनवाने के लिए चार लाख रुपये की डिमांड शासन को भेजी गई थी, मगर शासन से कोई पैसा नहीं आया, जिस कारण यह अटका हुआ है।
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शासन के हैं निर्देश
शासन के निर्देश पर दवा गोदाम के लिए जगह चिह्नित की जा रही है। पुराना दवा गोदाम लंबे समय से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। हालांकि मवाना में जो जगह चिह्नित की गई है, उस पर भी विवाद है, जो कोर्ट में चल रहा है। विवाद खत्म करने की कवायद की जा रही है। - डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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