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मिलों ने खड़े किए हाथ, कछुआ गति से चल रहा गन्ना सर्वेक्षण

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मेरठ। आगामी गन्ना पेराई सत्र के काफी संकट भरा होने की संभावना नजर आने लगी है। सरकारी से रियायत नहीं मिलने के चलते प्रदेश की अधिकतर शुगर मिलों ने गन्ना सर्वेक्षण से हाथ खींच लिए हैं। कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे गन्ना विभाग को सर्वेक्षण कराने में पसीने छूट रहे हैं। इसके चलते समय से सर्वेक्षण पूरा होने की उम्मीद कम है। हालांकि गन्ना विभाग अधिकारी समय से सर्र्वेक्षण कार्य पूरा करने का दावा कर रहे हैं।
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पेराई सत्र से पहले गन्ना विभाग मिल क्षेत्रों में गन्ना सर्वेक्षण कराता है। इसके तहत गन्ना रकबा, गन्ना प्रजाति के साथ ही पौधा और पेड़ी का सर्वे होता है। अब तक सर्वेक्षण कार्य में शुगर मिल सहायता करती आई है। गन्ना विभाग कर्मियों के साथ मिल कर्मियों की टीम सर्वे करती थी। इसके चलते सर्वेक्षण आराम से हो जाता था। लेकिन इस साल इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन यूपी ने सर्वे कार्य में मदद करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। एसोसिएशन की करीब 80 मिल सदस्य हैं। एसोसिएशन का कहना है कि चीनी के दाम जमींदोज हो गए हैं। सरकार रियायत दिए बगैर गन्ना मूल्य बकाया भुगतान के लिए दबाव डाल रही है। मिलों को गन्ना रेट के सापेक्ष चीनी उत्पादन में करीब 700 से 800 रुपये प्रति कुंतल का घाटा उठाना पड़ रहा है। बिना सरकारी मदद के वे भुगतान करने की स्थिति में नहीं है। इस बारे में एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरी समस्या बता दी है।
गन्ना विभाग के पास नहीं पर्याप्त कर्मचारी
गन्ना विभाग के पास सर्वे के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं है। विभाग ने गन्ना समिति और गन्ना परिषद् के सीजनल कर्मचारियों को सर्वे के लिए लगाया है। लेकिन इनकी भी संख्या कम होने से सर्वे कछुआ गति से ही हो पा रहा है। जब तक मिलों की मदद नहीं मिलेगी तब तक सर्वे कार्य में तेजी नहीं आएगी। उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने बताया कि मिलों द्वारा सर्वे से हाथ उठाने के बाद थोड़ी दिक्कत तो आ रही है। लेकिन इसे समय से पूरा कराने के लिए पूरा जोर लगाया गया है। तय समय के अंदर सर्वे पूरा करा लिया जाएगा।
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खास बातें:
- इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन यूपी ने गन्ना सर्वेक्षण कराने से कर दिया था मना
- गन्ना विभाग के पास नहीं पर्याप्त सुपरवाइजर, सीजनल कर्मियों के भरोसे चल रहा सर्वेक्षण
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