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प्रदूषण बढे़े या हादसों में हो इजाफा सरकारी सिस्टम खामोश है
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मेरठ। शहर की यातायात व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। पुलिस अफसरों के तमाम दावे भी हवा में उड़ने लगे हैं। शहर में दौड़ रहे अवैध तरीके से जुगाड़ यह बताने को काफी हैं कि प्रदूषण बढ़े या फिर हादसों में इजाफा हो, यहां की सड़कों पर सिस्टम खामोश है। ट्रैफिक पुलिस सिर्फ वाहनों का चालान काटकर अपनी ड्यूटी पूरी करती है। लेकिन पुलिस को यह जुगाड़ नहीं दिखाई देते।
अवैध तरीके से ऑटो, ई-रिक्शा तो शहर की यातायात व्यवस्था में मुसीबत बने हुए हैं ही। लेकिन अवैध जुगाड़ शहर की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे हैं। कभी भी यह जुगाड़ किसी के साथ हादसा कर सकते हैं। रविवार को शहर में लालकुर्ती और जीरो माइल के अलावा बेगमपुल और दिल्ली रोड पर जुगाड़ अवैध तरीके से दौड़ते दिखाई पड़े। ट्रैफिक पुलिस ने अवैध जुगाड़ को लेकर एक माह पहले अभियान भी चलाया था। लेकिन यह सिर्फ एक सप्ताह चलकर ही बंद हो गया। इस दौरान दो दर्जन अधिक जुगाड़ वाहनों पर कार्रवाई हुई थी। उसके बाद फिर से जुगाड़ शहर की सड़कों पर फर्राटा भरने लगे।
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तो साठगांठ से छोड़ दिए जुगाड़
ट्रैफिक कार्यालय के पीछे बीस से अधिक जुगाड़ खड़े किए थे। लेकिन अब वहां सिर्फ आधा दर्जन ही जुगाड़ रहे हैं। ऐसे में ट्रैफिक पुलिस ने तो क्या जुगाड़ वाहनों को साठगांठ कर छोड़ दिया गया है। ट्रैफिक पुलिस की मानें तो जुगाड़ अवैध हैं। जिनमें इंजन किसी वाहन का है और बॉडी दूसरे वाहन की लगाई गई है। पहिए अन्य किसी वाहन के हैं। ट्रैफिक ऑफिस में तैनात एक पुलिसकर्मी पर मिलीभगत के आरोप पहले ही उच्चाधिकारियों से लगाए गए हैं।
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पुलिस की नाक के नीचे अवैध पार्किंग
बेेगमपुल, जीरो माइल पर पुलिस की मिलीभगत से सड़क पर अवैध तरीके से पार्किंग बना ली गई। अवैध पार्किंग से बीच सड़क पर जाम लगता है। पुलिस की वहीं ड्यूटी रहती है और उसके बाद भी सड़क पर अवैध तरीके से वाहन खड़ा होते हैं। मुख्य चौराहों पर ई-रिक्शा और अवैध ऑटो का कब्जा रहता है। हापुड़ अड्डा चौराहा और भूमिया पुल पर भी यही हाल है। यहां अवैध तरीके से सड़क पर वाहन खड़े होने से जाम लगता है।
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