मेरठ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में शामिल सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के अभियान को तमाम विभागों ने मिलकर पलीता लगा दिया है। एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स की सूची में केवल खादर क्षेत्र की जमीन और उसके कब्जेदारों का ज्यादा विवरण है। जबकि शहर में एक भी भूमाफिया नहीं है।
तहसील मवाना की सूची सबसे बड़ी
तहसील मवाना के खादर क्षेत्र में ग्राम समाज, राजस्व विभाग, वन विभाग और सिंचाई विभाग की जमीनों को किसानों और बड़े भूमाफियाओं ने कब्जा रखा है। इसमें हस्तिनापुर और परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र लगता है। यहां 14 भूमाफियाओं ने 396.969 हेक्टेयर जमीन कब्जा रखी है। इन भूमाफियाओं में स्थानीय से ज्यादा बिजनौर के हैं।
ग्राम सभा की जमीन पर पांच कब्जेदार
प्रभारी अधिकारी भूलेख की रिपोर्ट में जिले में ग्राम सभा की भूमि पर पांच सबसे बड़े कब्जेदार दिखाए गए हैं। इनमें पांच भाईयों ने मिलकर सबसे ज्यादा 100 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया हुआ है। खादर की जमीन पर कब्जेदार बिजनौर के हैं। जबकि दो अन्य कब्जेदार मवाना तहसील, एक सरधना और एक मेरठ तहसील का है। ग्राम सभा की कुल 215.8150 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा दिखाया गया है।
तहसील मेरठ में मात्र दो भूमाफिया
तहसील मेरठ की सूची में मात्र दो भूमाफिया हैं। इनमें एक ने नंगलाताशी कासमपुर में सरकारी जमीन पर मकान व दुकान बनाई तो दूसरे ने किसान की जमीन कब्जा ली। वहीं, सरकारी जमीन पर कब्जों की सूची में पांच कब्जेदार हैं, जिन्होंने जिले में 3.552 हेक्टेयर जमीन कब्जा रखी है। इन सभी के वाद कोर्ट में विचाराधीन हैं। मोदीपुरम, दौराला, परतापुर में कई हजार हेक्टेयर चारागाह की जमीन पर इस समय कब्जा है। लेकिन इस जमीन का रिकॉर्ड या कब्जा करने वाले सूची में नहीं हैं।
शहरी क्षेत्र पूरी तरह कब्जा मुक्त
नगर निगम की अधिकांश संपत्तियों और जमीनों पर अवैध कब्जे हैं। लेकिन इस सूची में ऐसा कोई कब्जा नजर नहीं आ रहा है। वहीं, शहर की आउटर कॉलोनियों या मॉल, शापिंग कांप्लैक्स, कॉलेज, अस्पताल आदि के निर्माण में कहीं न कहीं सरकारी विभागों की जमीनों पर कब्जे हैं। लेकिन भूमाफियाओं की सूची से सब गायब हैं।
खास बातें
एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स की सूची दिखा रही विभागों की कार्यप्रणाली को आइना