क्रांति के घोष ने तोड़ा गांधी आश्रम का मौन
- गांधी आश्रम में दूसरे दिन भी हुई क्रांति गाथा डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग
- मंगलपांडे की फांसी सहित गदर के दृश्य हुए शूट
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सालों से गहरे सन्नाटे में जिंदगी बसर कर रहे गांधी आश्रम में सोमवार को चारों ओर भारत माता की जय, वीर सपूत मंगलपांडे की जय का उद्घोष गूंज रहा था। 1857 की गदर क ा नेतृत्व करने वाले मंगलपांडे को जैसे ही फिरंगियों के आदेश पर फांसी पर चढ़ाया गया तो गांधी आश्रम का चप्पा-चप्पा भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। लाल-सफेद वर्दी में काली टोपी पहने अंग्रेज अफसर जैसे ही सदर थाने के पास पहुंचे तो भारत मां के रणबांकुरों ने उनके खिलाफ क्रांति की ज्वाला फूंक दी। 10 मई 1857 को मेरठ के सदर थाने से शुरू हुई क्रांति ज्वाला में धीरे-धीरे मेरठ सहित पूरा देश धधकने लगा था। क्रांति युद्ध के इस जीवंत नजारे को सोमवार को गांधी आश्रम में शूट हो रही डॉक्यूमेंट्री के लिए फिल्माया गया।
गांधी आश्रम में दो दिन से मेरठ की क्रांति पर बन रही डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग हो रही है। सोमवार को डॉक्यूमेंट्री के लिए मंगलपांडे की शहादत 10 मई 1857 की वो शाम जब सदर से गदर की ज्वाला सुलगी ये दृश्य शूट हुए। मेरठ की क्रांति, दिल्ली चलो, दिल्ली के लिए जब सेना कूच का पोर्शन शूट किया गया। सुबह 5 बजे से लेकर देर रात 12 बजे तक टीम शूटिंग करती रही। फिल्म में मंगलपांडे का किरदार सज्जाद ने निभाया। धनसिंह कोतवाल से लेकर औघड़नाथ मंदिर के उस पुजारी को भी डॉक्यूमेंट्री में दिखाया जाएगा जिसने क्रांतिवीरों की मदद की थी। फिल्म के लिए गांधी आश्रम में मेरठ का परेड ग्राउंड, मंगलपांडे की फांसी का स्थल, जेल, मेरठ छावनी सहित अन्य सेट तैयार किए गए। 1857 के वक्त के जो चित्र व तस्वीरें टीम को मिली उन्हीं को देखते हुए टीम ने इस तरह सेट तैयार किया जो देखने में हूबहू उसी दौर का नजर आए। इस फिल्म में क्रांति गाथा के अलावा डॉक्यूमेंट्री की स्क्रिप्ट को अंतिम रूप देने वाले चार इतिहासकारों का संक्षिप्त साक्षात्कार वीडियो भी शामिल रहेगा। डॉक्यूमेंट्री में सबसे अहम बिंदु वॉइस ओवर का है। वॉइस ओवर कौन करेगा अभी कलाकार का नाम तय नहीं है। प्रोड्यूसर मोहित कपूर ने बताया कि दिल्ली निवासी वॉइस ओवर आर्टिस्ट ओपी राठौर का नाम फिलहाल चर्चा में है। ओपी राठौर इससे पहले भी कई प्रोजेक्ट के लिए वाइस ओवर कर चुके हैं। उन्हें यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।
हम हैं इसके मालिक गूंजेगा गीत
डॉक्यूमेंट्री में बीच-बीच में 1857 की क्रांति का प्रमुख गीत हम हैं इसके मालिक ये हिंदुस्तान हमारा है गूंजेगा। इस गीत को अंग्रेजों के खिलाफ उस वक्त अजीमुल्लाह खां ने लिखा था। इसी गीत को डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा बनाया गया है।
वीएफएक्स से दृश्यों को दे रहे ओरिजनल लुक
शहीद स्मारक के लाइट एंड साउंड शो के लिए बन रही डॉक्यूमेंट्री में भी वीएफएक्स तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। दृश्यों को क्रोमा और वीएफएक्स में शूट किया जा रहा है ताकि लड़ाई के दृश्य और सजीव लगें। फिल्म जीरो, 2.0, फ्लाइंग जाट, कृष जैसी फिल्मों में दृश्यों को और रोचक बनाने के लिए वीएफएक्स का प्रयोग किया गया है। इसी तकनीक से फिल्म जीरो में शाहरुख खान को बौना दिखाया गया।
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अंतिम दौर में है शूटिंग
शूटिंग लगभग अंतिम दौर में है। मंगलवार को बचे दृश्य शूट करेंगे। इसके बाद वॉइस ओवर रिकार्ड किया जाएगा। मार्च में फिल्म बनकर तैयार होने की पूरी संभावना है। -मोहित कपूर प्रोड्यूसर
दिखेगा मेरठ का योगदान
मेरठ से क्रांति शुरू हुई यह तो लोग जानते हैं, लेकिन उस क्रांति में मेरठ शहर का अपना कितना बड़ा योगदान था इसका विवरण उन्हें इस डॉक्यूमेंट्री से मिलेगा। -आर्यन आदित्यो प्रोड्यूसर