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कुंभ मेला: मेरठ के 12 पेपर मिलों को शासन की हॉ का इंतजार

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कुंभ मेले के दौरान उद्योगों को किया जा रहा बंद
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शासन के निर्देश पर कमेटी ने भेजी है रिपोर्ट

मोदीपुरम (मेरठ)। कुंभ मेले के दौरान उद्योगों के बंद करने के मामले में मेरठ के 12 पेपर मिलों ने रोस्टर में छूट मांगी है। उद्यमियों का दावा है कि वह गंदा पानी काली नदी में नहीं डाल रहे हैं। उनके उद्योगों से निकलने वाले पानी को वह रिसाइकिलिंग या फिर सिंचाई में इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला स्तरीय कमेटी ने भी इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
कुंभ मेले का पहला स्नान 15 जनवरी को था। दूसरा स्नान 21 जनवरी को हो गया। अब तीसरा स्नान 4 फरवरी को होगा। कुंभ मेले को लेकर वेस्ट यूपी के 9 जिलों के 843 औद्योगिक बंद किए गए हैं। मेरठ के 12 पेपर मिलों का दावा है कि उनके यहां से कोई पानी नहीं निकल रहा है। वह पानी को रिसाइकिलिंग या फिर सिंचाई में इस्तेमाल कर रहे हैं। जब पेपर मिलों से कोई पानी नहीं निकल रहा है, फिर उन्हें रोस्टर में छूट दी जाए। इस मामले में पेपर मिलों के मालिकों ने लखनऊ में मुख्य सचिव से मुलाकात की थी, जिसके बाद शासन के निर्देश पर पेपर मिलों का निरीक्षण कर जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सीनियर एई एमके त्यागी, प्रखर कटियार, एसडीएम मवाना और एसडीएम सदर समेत पूरी जिला स्तरीय अनुश्रवण कमेटी ने निरीक्षण किया। निरीक्षण करने के बाद 25 जनवरी को रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
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ऐसे बंद हो रहे हैं उद्योग
मौनी अमावस्या 4 फरवरी
4 फरवरी को बंद होंगे उद्योग।
बसंत पंचमी 10 फरवरी
1,2,3,10 फरवरी को बंद होंगे उद्योग।
माघी पूर्णिमा 19 फरवरी
10,11,12,19 फरवरी को बंद होंगे उद्योग।
महाशिवरात्रि 4 मार्च
23, 24, 25फरवरी, 4 मार्च को बंद होंगे उद्योग।

ये पेपर मिल कर रहे है रोस्टर में छूट की मांग
जानकी न्यूज प्रिंट, कनव पेज प्राइवेट लिमिटेड, स्टार क्राफ्ट पेपर, देव प्रिया प्रोडेक्ट, देव प्रिया इंडस्ट्रीज, देव प्रिया प्राईवेट लिमिटेड, आंनद डुपलेक्स, आनंद ट्रिपलैक्स बोर्ड लिमिटेड, श्री वेंक्टेश्वर पेपर प्राइवेट लिमिटेड, संगल पेपर लिमिटेड, चामुंडा पेपर लिमिटेड, पसवाड़ा पेपर।

एनजीटी और हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
पेपर मिलों ने सबसे पहले रोस्टर में छूट के लिए एनजीटी में मांग की थी। एनजीटी ने कुंभ पर कोई राहत नहीं दी। इसके बाद इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में रिट डाली गई थी, लेकिन वहां पर भी कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने यह निर्देश दिए कि शासन द्वारा रोस्टर के आधार पर ही उद्योगों को बंद किया जाए।
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शासन के निर्देश का इंतजार
पेपर मिलों ने रोस्टर में छूट की मांग कर रखी है। इस मामले में शासन ने पेपर उद्योगों का निरीक्षण कर रिपोर्ट मांगी है। जिला स्तरीय अनुश्रवण कमेटी ने निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। फिलहाल पूर्व में रोस्टर के अनुसार उद्योगों को बंद किया जा रहा है। - आरके त्यागी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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