मेरठ। मेरठ में हुई भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक ने सभी दलों की सियासत गरमा दी है। खास तौर से भाजपा के दलित एजेंडे पर बसपा ने मंथन शुरू किया है। खास तौर पर कहा गया है कि भाजपा के ऐसे सभी कार्यक्रमों पर नजर रखी जाए जिसमें दलितों को लुभाने की कवायद है।
सुभारती विवि के ऑडिटोरियम में भाजपा कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक रविवार को सम्पन्न हुई। इस बैठक को लेकर भाजपा इस कदर गंभीर थी कि दोनों दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बैठक में मौजूद रहे। इसके अलावा गृह मंत्री राजनाथ सिंह बैठक में आए तो वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को चुनाव 2019 की जीत का मूल मंत्र दिया। इस बैठक में जिस तरह की रणनीति बनाई गई है उससे दूसरे दलों में मंथन शुरू हो गया है। बैठक का सार रहा कि अगड़ों और पिछड़ों के साथ दलितों को पार्टी से जोड़ो। भाजपाइयों ने उन कार्यों पर बात की जो दलित हित में किए गए। मसलन, एसएसीएसटी एक्ट में संशोधन विधेयक हो या एएमयू में आरक्षण की बात। सभी केजरिए भाजपाइयों ने दलितों को साधने की कोशिश की। साथ ही यह भी कहा कि विशेष रूप ये यह ध्यान देना होगा कि हर बूथ पर दलितों की उपस्थिति बतौर कार्यकर्ता मौजूद रहे। बूथ मैनजमेंट में 25 प्रतिशत दलित युवाओं को शामिल करने की बात कही गई।
बसपाइयों में बेचैनी
भाजपा के इस दांव से बसपा में बेचैनी है। भीम आर्मी जैसे संगठन वैसे ही बसपा के लिए चुनौती बने हैं। ऐसे में भाजपा का बड़ा दांव बसपा को परेशान किए है। हालांकि बसपा के रणनीतिकारों का कहना है कि दो अप्रैल को हुए उपद्रव के बाद अब दलित भाजपा की नाव में सवार होने वाले नहीं है। यही प्रचार किया जा रहा है कि दो अप्रैल के बाद दलितों पर हुकूमत ने जुल्म किया। उन लोगों को भी जेल भेजा जिनका इससे कोई वास्ता नहीं था। दलित उत्पीड़न के मामलों को चिह्नित कर बसपा पूरे वेस्ट यूपी में इनके साथ दलितों के बीच जा रही है। अब बसपा इससे निपटने का प्लान बना रही है। इस योजना को कैसे अमली जामा पहनाया जाया, इस पर जोर है। बसपा ने अपने सभी सिपहसालारों को कहा है कि बूथ कमेटी पर वह भी अपने युवाओं की संख्या बढ़ाए।
खास बातें:
- भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक पर थी सभी दलों की नजर
- अब अधिकतर दलाें से आला कमान ले रहा फीड बैक
- स्थानीय स्तर के नेताओं ने भेजी रिपोर्ट