प्रत्याशी की घोषणा से तय होगी चुनावी व्यूह रचना
शामली। कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव पर विपक्षी गठबंधन प्रत्याशी की घोषणा से ही चुनावी रण की व्यूह रचना तय होगी। शुक्रवार को हुई अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की मुलाकात में यह तो लगभग तय हो गया कि इस सीट पर सपा चुनाव लड़ेंगी, लेकिन प्रत्याशी कौन होगा, इस पर निर्णय साफ नहीं हुआ है। प्रत्याशी कश्यप, या मुस्लिम कौन होगा यह ध्रुवीकरण को ध्यान में रखकर तय किया जाएगा। हर दिन कयास और चर्चाओं में प्रत्याशी का नाम बदल रहा है।
कैराना सीट मुस्लिम और दलित वोटों का गणित देखते हुए बृहस्पतिवार शाम तक पूर्व सांसद तब्बसुम का नाम आगे चल रहा था। शुक्रवार को अचानक जयंत चौधरी और अखिलेश यादव के बीच लखनऊ में मुलाकात के बाद नए कयास शुरू हो गए, कि सीट रालोद के खाते में जा रही है और जयंत चौधरी चुनाव लड़ेंगे। शाम होते होते सपा के ही चुनाव लड़ने की बात सामने आई। प्रत्याशी तय करने में सपा को भी मशक्कत करनी पड़ रही है। गठबंधन का जोर ध्रुवीकरण रोकने पर है। अखिलेश यादव से वार्ता करने के बाद जयंत चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह से भी मुलाकात की।
विकल्प एक
मुस्लिम प्रत्याशी की बात करें तो तबस्सुम हसन के बेटे विधायक नाहिद हसन को 2014 के लोकसभा चुनाव में कैराना सीट पर 3,29,081 वोट मिले थे, तब बसपा प्रत्याशी भी चुनाव लड़ा था, लेकिन अब बसपा भी सपा के साथ रहेगी तो एक मजबूत समीकरण होगा।
विकल्प दो
जाट बिरादरी के भी करीब डेढ़ लाख मतदाता बताए जाते हैं, जिस कारण दलित, मुसलिम और जाट के समीकरण को साधने के लिए सपा की तरफ से प्रोफेसर सुधीर पंवार के नाम भी चल रहा है।
विकल्प तीन
कैराना सीट पर करीब पौने दो लाख कश्यप वोटर बताए जाते हैं, जिसके चलते एक विकल्प पिछड़ा कार्ड खेलकर कश्यप समाज को साधने का भी है। किरणपाल कश्यप और सुधाकर सिंह कश्यप के नाम भी सुर्खियों में हैं।