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आरजी कॉलेज में प्राचार्या के पद पर घमासान

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आरजी कॉलेज में प्राचार्या पद पर घमासान
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मेरठ। आरजी पीजी कॉलेज में प्राचार्या के पद को लेकर घमासान शुरू हो गया है। गृह विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अर्चना शर्मा की शिकायत पर कुलपति ने मैनेजमेंट सचिव को सीनियर मोस्ट टीचर को प्राचार्या के पद पर नियुक्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इससे डेढ़ महीने पहले ही मैनेजमेंट द्वारा ज्वाइन कराई गईं प्राचार्या डॉ. दीपशिखा की कुर्सी खतरे में आ गई है।
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गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना शर्मा ने खुद को सीनियर मोस्ट टीचर बताते हुए कुलपति प्रो. एनके तनेजा से शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि कॉलेज में वे सबसे सीनियर हैं। उनकी नियुक्ति 16 मार्च 79 की है। रीडर पदनाम की तिथि 16 मार्च 1992 है। उनकी सेवा 38 साल दस महीने की है। ऐसे में वे सीनियर लिस्ट में पहले नंबर पर हैं। पीएचडी धारक और यूजीसी के नियमानुसार वे प्राचार्या पद की योग्यता धारक हैं। इसमें उन्होंने ये भी बताया था कि उन्होंने आरजी कॉलेज में 1 फरवरी 1983 को ज्वाइन किया था लेकिन वीएमएलजी कॉलेज में उनकी नियुक्ति 16 मार्च 79 को हुई थी। डॉ. दीपशिखा की नियुक्ति छह जनवरी 1983 की हैं। पूरे मामले की शिकायत पर कुलपति की तरफ से कमेटी का गठन किया गया। इस मामले में मैनेजमेंट से भी पक्ष लिया गया। जिसके बाद मंगलवार को विश्वविद्यालय ने आदेश जारी कर दिए हैं कि अर्चना शर्मा ही सीनियर मोस्ट टीचर हैं। आदेश में कॉलेज के सचिव को गलत तथ्यों को ठीक करते हुए कॉलेज में सीनियर मोस्ट टीचर को प्राचार्या नियुक्त करने को कहा है। प्राचार्या डॉ. दीपशिखा का कहना है कि उन्हें कोर्ट के आदेश के बाद ही मैनेजमेंट ने ज्वाइन कराया था। उन्होंने कहा कि मुझे अभी ऐसे किसी आदेश की जानकारी नहीं है। कॉलेज में आदेश आने के बाद हम भी अपना कानूनी पक्ष रखेंगे। इस प्रकरण को लेकर आरजी कॉलेज में शिक्षिकाएं भी दो खेमों में बंट गई हैं।
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खास बातें:
कुलपति ने सीनियर टीचर को प्राचार्या के पद पर नियुक्त करने के आदेश दिए
पिछले महीने मैनेजमेंट ने कराया था डॉ. दीपशिखा को ज्वाइन, खतरे में कुुर्सी
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