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इन्हें तो जिंदगी की कोई परवाह ही नहीं

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मेरठ। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि हेलमेट के बिना दोपहिया वाहन चलाकर इतना बड़ा जोखिम उठाया जा रहा है। पुलिस चालान करती है, तो परेशानी होने के बावजूद भी सबक नहीं लिया जा रहा। शहर की सड़कों पर लगातार हादसों के बाद भी वाहन चलाने में सावधानी नहीं बरती जा रही है।
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हाइवे हो या शहर या फिर देहात की सड़कें, कहीं पर भी ट्रैफिक के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि जिले में औसतन रोजाना तीन हादसे होते हैं। शहर की सड़कों पर कभी भारी वाहन दोपहिया वाहन चालक की जान लेते हैं तो कभी अन्य वाहन। दो पहिया वाहन फिसल जाए तो सिर में ही चोट लगती है, जो अधिकांश मामलों में मौत का कारण भी बन जाती है। लेकिन इसके बावजूद बिना हेलमेट के ही दोपहिया वाहन चलाने की आदत सी बन गई है। नियम कानून और हादसों से सबक लेना भी उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। चाहे स्कूल के छात्र हों या फिर छात्राएं। लड़की और महिलाएं भी दोपहिया वाहन को बिना हेलमेट पहनकर चलाती हैं।
हैरत की बात है कि समाज को नियम कानून सिखाने वाले पुलिसकर्मी खुद नियम तोड़ रहे हैं। वे भी दोपहिया वाहन पर बिना हेलमेट के निकलते हैं। चौराहों पर चेकिंग करने वाली ट्रैफिक पुलिस और लोगों से हेलमेट पहनने का आह्वान करने वाले अफसर भी ऐसे पुलिसकर्मियों पर ध्यान नहीं देते।
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चालान से भी नहीं डरते
ट्रैफिक पुलिस शहर में अभियान चलाती हैै। रोजाना चालान भी काटे जाते हैं। लेकिन उसके बाद भी लोग सीख नहीं ले रहे। एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेई का कहना है कि 25 फरवरी के बाद से पूरे शहर में सघन अभियान चलाया जाएगा।
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