मेरठ। इस्माईल नेशनल महिला डिग्री कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शुभारंभ मुख्य अतिथि सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा, कॉलेज सचिव दयानंद गुप्ता ने किया। संगोष्ठी का विषय इंडियन इंग्लिश लिटरेचर ए पर्सपेक्टिव ऑफ द हॉल वैली रखा गया।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता गुरुकुल कांगड़ी विवि हरिद्वार के प्रो. श्रवण कुमार रहे। अतिथि वक्ता गोरखपुर विवि से आए प्रो. आलोक कुमार, सीसीएसयू से सेवानिवृत्त एचओडी प्रो. मनोरमा त्रिखा रहीं। प्राचार्या डॉ. साधना सहाय ने कौटिल्य की विविध क्षेत्रों में योगदान पर विचार रखे।
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. श्रवण कुमार ने प्राचीन काल के साहित्य से लेकर वर्तमान साहित्य पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि अच्छा साहित्य कभी मरता नहीं। छात्राओं को ब्रह्मवाद सूफी काव्य की भी जानकारी दी। अतिथि वक्ता प्रो. आलोक कुमार ने कहा कि 30 सालों में भारतीय अंग्रेजी साहित्य का योगदान सराहनीय रहा है। प्रो. मनोरमा त्रिखा ने कहा कि दुनिया में हजारों भाषाएं हैं जो भारतीय साहित्य का योगदान है। अंग्रेजी साहित्य उनके लिए है जो अंग्रेेजी का प्रयोग करते हैं। भारतीय अंग्रेजी साहित्य का अपना अलग योगदान है। सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा कि साहित्य विद्यार्थियाें के व्यक्तित्व के विकास में सहायक है। हमारी युवा पीढ़ी को साहित्य पर विशेष ध्यान देना होगा। प्रथम सत्र में चारों भाषाओं से जुड़े वक्ताओं ने भारतीय अंग्रेजी साहित्य पर विचार रखे। वक्ता डॉ. मालती अग्रवाल, डॉ. एमएल गर्ग, डॉ. रीटा गर्ग, डॉ. हुमा मसूद, डॉ. फौजिया बानो व डॉ. दीपा त्यागी रहे। तकनीकि सत्र में अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत, उर्दू साहित्य के शोध पत्र पढ़े गए। संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. पारुल त्यागी रहीं। संगोष्ठी को सफल बनाने में डॉ. अर्शिया, डॉ. कोमल त्यागी, डॉ. हुमैरा, डॉ. अनुरिता ने सहयोग दिया।