शहर के 50 बाजार जिनमें पार्किंग की दरकार
- अभी तो रैपिड ट्रेन के लिए मिट्टी की जांच का काम होने से ही शहर में हालत है खराब
- जब ट्रैक पर शुरू होगा काम तो क्या होगा हाल, पहले ही ठोस प्लानिंग बनानी होगी
- सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 50 बाजारों में होनी चाहिए पार्किंग, यूएमटीसी दे चुकी है प्रजेंटेशन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। शहर में 50 बाजार ऐसे हैं जहां पार्किंग की दरकार है। इन बाजारों में वाहन खड़े होने की कोई इंतजाम नहीं है। रैपिड ट्रेन के एलाइनमेंट पर काम शुरू करने से पहले इन बाजारों का इंतजाम करना होगा। यूएमटीसी मेट्रो की डीपीआर के लिए किए गए थ्योरीटिकल सर्वे का भी अध्ययन कर रही है जिसमें यह तथ्य सामने आया है।
शहर में इस समय हाल बुरा है। एनसीआरटीसी शहर में रैपिड ट्रेन के लिए मिट्टी की जांच का काम कर रही है। गलती एनसीआरटीसी की नहीं, यहां के सिस्टम की है, जिसकी खराब व्यवस्था ने पूरा शहर जाम कर रखा है। शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कई प्लान बने। लेकिन काम नहीं हो पाया। अब यूएमटीसी इस पर प्लान तैयार कर रही है। इसके लिए यह संस्था प्रजेंटेशन भी कर चुकी है।
पार्किंग निकली बड़ी समस्या
यूएमटीसी ने इस बाबत मेट्रो की डीपीआर का भी अध्ययन किया। पूरे प्लान का प्रजेंटेशन किया गया। अध्ययन में पाया गया कि थ्योरीटिकल सर्वे यह स्पष्ट कर रहा है कि शहर में जाम का सबसे बड़ा कारण क्या है। यह कारण है बाजारों में पार्किंग न होना। शहर के पचास बाजार ऐसे हैं जहां पार्किंग की दरकार है। लेकिन यहां पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है।
बड़ा सवाल कैसे होगा इंतजाम
अहम सवाल यह है कि इन स्थानों पर कैसे पार्किंग का इंतजाम होगा। यहां जगह ही नहीं है। जहां जगह है भी तो वहां अन्य तमाम अड़चनें हैं। मल्टी लेवल पार्किंग का सपना भी इसलिए ही परवान नहीं चढ़ पाया। कभी कैंट क्षेत्र में तो कभी निगम के टाउन हाल में प्रोजेक्ट इधर से उधर होता रहा और बात नहीं बनी। यहां तक कि एमडीए अपने ही परिसर में मल्टी लेवल पार्किंग नहीं बना पाया।
2024 तक करना है काम
मुख्य सचिव इस बाबत निर्देश दे चुके हैं। कहा जा चुका है रैपिड के प्रोजेक्ट पर वर्ष 2024 तक काम पूरा करने का लक्ष्य है। टारगेट है कि इसी वर्ष दिसंबर माह में रैपिड का काम शुरू हो जाएगा। ऐसे में इससे पहले ही व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी। इसके लिए ही इसी सप्ताह यूएमटीसी अपना प्रजेंटेशन फिर से पेश करने जा रही है।
चौराहे पर करना होगा विशेष काम
चूंकि प्रोजेक्ट पर काम शुरू होते ही सारा ट्रैफिक सिस्टम गड़बड़ा जाएगा तो ऐसे में सबसे गंभीरता से काम चौराहों पर करना होगा। हालांकि चौराहों पर काम करना प्लानिंग का अहम हिस्सा है और माना जा रहा है कि सबसे पहले इन्हीं पर शार्ट टर्म प्लान पर काम होगा। बाजारों में पार्किंग होनी चाहिए यह तो चिह्नित किया गया है। लेकिन कैसे बनेगी इसका प्लान अलग से बनाना होगा।
बस अड्डे बाहर नहीं होंगे तो फेल रहेंगे सारे प्लान
ट्रैफिक पुलिस अपनी रिपोर्ट में साफ कह चुकी है कि बस अड्डों को बाहर किया जाए। यह भी तय है कि जब तक बस अड्डे खास तौर पर दिल्ली रोड स्थित भैसाली बस अड्डा शहर से बाहर नहीं होगा तब तक कोई भी प्लान सही तरह से शहर में काम नहीं करेगा।
जल्द ही खोजेंगे निदान
आयुक्त की अध्यक्षता में इसी मसले को हल करने के लिए बैठक हुई थी। यातायात व पार्किंग आदि का प्लान बनाने की जिम्मेदारी यूपीएमटीसी को दी गई है। जल्द ही फिर से बैठक हो रही है जिसमें यह संस्था प्लान पेश करेगी। कवायद चल रही है और जल्द ही इस समस्या का निदान खोजा जाएगा- राजेश कुमार पांडेय, वीसी एमडीए