12819 हजार नहीं हो पाए पास
पिछले साल फेल हुए थे 12 हजार 412 परीक्षार्थी
2017 में फेल हुए थे 15 हजार 173 परीक्षार्थी
मेरठ। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा देने वाले 12 हजार 819 परीक्षार्थी इस बार ऐसे रहे, जो फेल हो गए। इनमें इंटरमीडिएट के 8970 परीक्षार्थी हैं और हाईस्कूल के 3849 परीक्षार्थी। मनोचिकित्सकों का कहना है कि अभिभावकों को इन बच्चों का हौसला बढ़ाना चाहिए।
इस बार हाईस्कूल 43758 स्टूडेंट्स पंजीकृत थे, इनमें से 40063 परीक्षार्थी परीक्षा में बैठे और 36214 पास हुए। इंटरमीडिएट में 40280 स्टूूडेंट्स पंजीकृत थे, 37054 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी और 28084 परीक्षार्थी पास हुए। पंजीकृत परीक्षार्थियों में से 6921 विद्यार्थी ऐसे रहे, जिन्होंने परीक्षा छोड़ दी थी। पिछले साल 12 हजार 412 परीक्षार्थी फेल हुए थे, जबकि 2017 में मेरठ में हाईस्कूल-इंटरमीडिएट में 15 हजार 173 परीक्षार्थी फेल हुए थे।
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा का कहना है कि विद्यार्थी का ज्ञान उसके जीवन की दिशा तय करता है, न कि अंक। लिहाजा विद्यार्थियों और परिजनों को चाहिए जैसा भी रिजल्ट मिला है, उसे स्वीकार करते हुए आगे बढ़ें। वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक गिरजेश चौधरी का कहना है कि अपने बच्चों की किसी से तुलना न करें। कई बार परिजन अपने बच्चे के कम अंक आने या फेल होने पर ज्यादा अंक लाने वाले या पास होने वाले बच्चे से तुलना करते हैं, जिससे वह उदास हो जाता है।