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पेट की खातिर मतदान से वंचित सैकड़ों मजदूर

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देश भर के विभिन्न हिस्सों से करीब ढाई हजार लोग यहां भट्ठों पर काम करने आते हैं
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मवाना तहसील क्षेत्र में करीब पचास भट्ठे बना रहे हैं ईंट
मतदान का प्रतिशत बढ़ाने पर निर्वाचन आयोग का जोर
अमर उजाला ब्यूरो
मवाना। लोकसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देश पर तहसील अधिकारी लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसके बावजूद एक वर्ग ऐसा भी है जो पेट की खातिर चुनाव के इस महापर्व से अलग रहता है। गर्मियां शुरू होते ही पूर्वांचल से ईट भट्ठों पर काम करने के लिए आने वाले मजदूर चुनावी शोर से दूरी बनाए रखते हैं। जागरुकता का अभाव एवं आर्थिक संकट से जूझ रहे इन लोगों द्वारा मतदान नहीं करने के कारण मतदान का प्रतिशत प्रभावित होता है।
मतदान के लिए किया जा रहा जागरूक
लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण का मतदान 11 अप्रैल को होगा। इसमें मतदान का प्रतिशत बढ़े इसके लिए निर्वाचन आयोग के निर्देश पर स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्रा, तहसील अधिकारी एवं विभिन्न विभागों के कर्मचारी लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं। मतदान के लिए जागरूक करने के लिए स्कूल-कॉलेजों में पोस्टर प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक, रैली आदि आयोजित की जा रही हैं। यही नहीं निर्वाचन आयोग द्वारा इस बार मतदान के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए वैन हर गांव-गांव में पहुंच रही है।
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50 से अधिक भट्ठों पर कर रहे सैकड़ों मजूदर कार्य
मवाना तहसील अंर्तगत लगभग 50 से अधिक ईंट भट्ठे आते हैं। जिन पर पूर्वांचल और देश के दूसरे हिस्सों से आने वाले करीब ढाई हजार मजदूर कार्य करते हैं। इन दिनों में ये मजदूर यहां कार्य कर रहे हैं। ये जून-जुलाई के बाद अपने गांव को लौट जाते हैं। मवाना स्थित एक ईंट भट्ठे पर कार्य करने वाले बिहार के पटना जिले के गांव बेलछी निवासी राजू ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। पेट की खातिर वह इतनी दूर आकर मजदूरी करते हैं। उन्हें चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें नहीं पता कि उनके यहां कौन से राजनीतिक दल का कौन प्रत्याशी चुनाव लड़ रहा है। कभी कभार फोन पर पड़ोसियों से बातचीत होती है। वहीं, चुनाव का जिक्र करते राजू की पत्नी उर्मिला ने बताया कि उन्होंने आज तक मतदान नहीं किया। न ही उनके पास कोई प्रत्याशी वोट मांगने आया। वहीं, बाबू पुत्र चरण सिंह, रामकिशोर पुत्र पप्पू, केसरिया, फूलवती पत्नी रामकिशोर, सीता पत्नी बाबू, रानी पत्नी केसरिया ने भी चुनाव के प्रति बेरुखी दिखाई। इन लोगों की तरह सैकड़ों मजदूर ऐसे हैं, जिन्हें पेट की खातिर मतदान करने का मौका ही नहीं मिलता। इसी कारण यह वर्ग चुनावी शोर से दूर ईट भट्ठों पर परिजनों के साथ रहते हैं।
न कोई व्यवस्था, नहीं किया जाता जागरूक
मतदान के दिन ड्यूटी करने वाले शिक्षक-शिक्षिका, विभिन्न विभाग के अधिकारी एवं पुलिसकर्मियों को मतदान करने के लिए निर्वाचन आयोग की तरफ से व्यवस्था की जाती है। इन अधिकारियों को एक फार्म दिया जाता है। वे अपने प्रत्याशियों को मतदान के दिन वोट दे देते हैं। हालांकि निर्वाचन आयोग ने आज तक दूरदराज से ईट भट्ठों पर कार्य करने आने वाले इन मजदूरों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की है। प्रतिदिन अधिकारी विभिन्न तरीकों से लोगों को मतदान के लिए जागरूक कर रहे हैं। इन मजदूरों के पास आज तक कोई कर्मचारी, अधिकारी उन्हें मतदान के लिए जागरूक करने नहीं पहुंचा।
आयोग करे व्यवस्था
मतदान के दिन जैसे ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों, मतदान अधिकारियों को निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान की सुविधा दी जाती है। इसी तरह इन मजदूरों को भी मतदान करने के लिए निर्वाचन आयोग को व्यवस्था करनी चाहिए। जिससे मतदान करके लोकतंत्र के पर्व में शामिल हो सकें। -डॉ. मेघराज, प्रवक्ता एएस इंटर कॉलेज मवाना
ऑनलाइन हो मतदान
कई देशों में इस तरह की व्यवस्था है कि यदि कोई व्यक्ति बाहर है तो वह ऑनलाइन मतदान कर सकता है। निर्वाचन आयोग को भी इस तरह की व्यवस्था करनी चाहिए। केवल मजदूर ही नहीं बहुत से ऐसे लोग हैं जो दूसरे शहरों में नौकरी कर रहे हैं। इसके चलते मतदान नहीं कर पाते हैं। ऑनलाइन व्यवस्था होने से हर व्यक्ति मतदान कर सकेगा।-अनुराग दुबलिश, समाजसेवी
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निर्वाचन आयोग द्वारा सरकारी कर्मचारियों के लिए पोस्ट की व्यवस्था की गई है। हालांकि ऐसे लोगों के लिए अभी ऐसी व्यवस्था नहीं है। हालांकि विदेशों की तरह यदि ऑनलाइन व्यवस्था हो तो मतदान का प्रतिशत सौ फीसदी तक हो सकेगा।-अंकुर श्रीवास्तव, एसडीएम मवाना
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