कमजोर पैरवी, मेरठ के ऐतिहासिक स्थलों को नहीं मिली फूटी कौड़ी
मेरठ से सटे गढ़मुक्तेश्वर, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के लिए योगी ने खोला खजाना
सरधना, हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़ समेत छावनी के स्थलों के लिए नहीं दिया बजट
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। ऐतिहासिक नगरी मेरठ एक बार फिर पर्यटन के नक्शे पर आने से वंचित रह गया। जनप्रतिनिधियों की कमजोर पैरवी के कारण सरधना, हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़ के ऐतिहासिक स्थल के विकास के लिए फूटी कौड़ी नहीं मिली। जबकि मेरठ से सटे गढ़मुक्तेश्वर, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के विकास के लिए मुख्यमंत्री ने खजाने का मुंह खोल दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहारनपुर के शाकुंभरी देवी मंदिर, मुजफ्फरनगर के शुक्रताल में विकास के लिए बजट दया। गढ़मुक्तेश्वर के पर्यटन स्थलों के विकास के लिए ही 27 करोड़ का बजट स्वीकार किया है। लेकिन मेरठ का नाम कहीं नहीं आया।
ये हैं प्रमुख पर्यटन स्थल
मेरठ में 1857 की क्रांति का गवाह औघड़नाथ मंदिर सहित छावनी के कई स्थल हैं, जहां ब्रिटिश हुकूमत ने राज किया था। महाभारत युद्ध का गवाह हस्तिनापुर, पांडव टीला, बूढ़ी गंगा है। सरधना का मशहूर बेगम समरू चर्च, आलमगीरपुर, परीक्षितगढ़ स्थित श्रृंगी ऋषि आश्रम, अबू का मकबरा आदि प्रमुख स्थल हैं। हस्तिनापुर के जैन मंदिरों में भी देशभर से श्रद्धालु आते हैं। इन सभी पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं न मिलने और जीर्ण-शीर्ण हालत के कारण लगातार पर्यटकों की संख्या कम होती जा रही है।
वर्जन
सरकार मेरठ के ऐतिहासिक स्थलों की अनदेखी कर रही है। हस्तिनापुर, आलमगीरपुर, परीक्षितगढ़, सरधना ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां लोग आना चाहते हैं। लेकिन अव्यवस्थाएं, आवागमन की उचित सुविधा न होने के कारण पर्यटक आने से कतराते हैं।
- डॉ. प्रियंक भारती, संस्थापक नेचुरल साइंस ट्रस्ट
मेरठ 1857 की क्रांति स्थली है। अंग्रेजों ने यहां लंबे समय तक शासन किया। अपनी छावनी बनाई। मेरठ की धरती से ही अंग्रेेजों के खिलाफ विरोध के सुर बुलंद हुए। ऐसे कई स्मारक शहर में मौजूद हैं। लेकिन सरकार इन स्मारकों के संरक्षण पर ध्यान नहीं दे रही है।
- डॉ. अमित पाठक, इतिहासकार