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एक सप्ताह ही चले रजवाहे कहां से हो गेंहू की सिचाई

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अमर उजाला ब्यूरो
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बहसूमा। बीते दो माह में केवल एक सप्ताह ही रजवाहा चलने के बाद सिंचाई विभाग ने फिर से सफाई के नाम पर रजवाहे एवं नहर बंद कर दी है। जिससे रजवाहे एवं गूल आदि से जुडे़ किसानों की फसलों की सिंचाई नहीं होने से सूखने लगी है। किसानों ने सिंचाई विभाग से रजवाहे में पानी छोड़ने की मांग की है।
ग्राम सदरपुर निवासी किसान अनिल कुमार, अशोक कुमार, ओमबीर सिंह ने बताया कि अपर लोअर चुड़ियाला से सदरपुर रजवाहे की पानी की निकासी है। जिससे सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा कृषि भूमि का फसल का उत्पादन जुड़ा है। किसानों का कहना है कि बीते दो माह से रजवाहे से कभी सफाई के नाम पर तो कभी पटरी की मरम्मत के नाम पर रजवाहे में पानी नहीं छोड़ा गया है। आजकल सर्दी एवं कोहरा पड़ रहा है। किसानों की फसल को कोहरे से बचाव के लिए पानी की आवश्यकता पड़ती है। किसानों का आरोप है कि पानी नहीं मिलने से गेहूं की पहली सिंचाई भी नहीं की गई है। गन्ने एवं सरसों की फसल की भी सिंचाई नहीं की जा सकी है। जिससे फसलों पर पाले का असर दिखाई देने लगा है। किसानों ने रजवाहे में पानी छोड़ने की मांग की है। वहीं, अकबरपुर सादात निवासी किसान सतवीर सिंह, राजपाल सिंह व बदरे आलम का कहना है कि अकबरपुर सादात नहर से निकले भट्ठे वाले रजवाहे से जुडे़ किसानों की गेहूं एवं बरसीम की फसल सूख रही है। उन्होंने शीघ्र ही नहर में पानी छोड़ने की सिंचाई विभाग से मांग की है। इस संबंध में सिंचाई विभाग के जेई नीरज भारद्वाज का कहना है कि रजवाहों की सफाई के बाद कुछ जगह की गूलों की सफाई होना शेष रह गई थी। गूलों की सफाई का अभियान चल रहा है। एक सप्ताह के भीतर रजवाहे में पानी छोड़ दिया जाएगा।
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सेंटर पर बाट नहीं होने से घटतौली जारी
बहसूमा। टिकौला शुगर मिल के क्रय केंद्रों पर जांच के लिए बाट ही गायब हैं। बिना बाट के कांटों के स्टेपिंग नहीं हो सकती है। आरोप है कि गन्ने की व्यापक घटतौली कर किसानों का शोषण किया जा रहा है। किसानों ने इसकी डीसीओ मुजफ्फरनगर से शिकायत की है। पेराई सत्र को चालू हुए डेढ़ माह से अधिक हो गया है। किसान महेंद्र सिंह, संजय डायरेक्टर, गजे नागर आदि ने बताया कि टिकौला एवं मवाना शुगर मिल द्वारा लगाए गए क्रय केंद्रों रहमापुर, समसपुर, बहसूमा सी व डी, मौड़कला, शाहपुर, बटावली, झुनझुनी आदि स्थानों पर लगे कांटों पर बाट ही गायब हैं। हालांकि नियम के अंतर्गत बिना मानक बाट के कांटों का स्टेपिंग नहीं हो सकती है। मिलों के संचालन को डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी गेहूं की बुआई के लिए किसानों को गन्ने डालने की आपाधापी मची हुई है। शुगर मिल इसका पूरा लाभ उठा रहे हैं। गेहूं के लिए खेत खाली करने के प्रयास में किसान पिस रहा है। टिकौला मिल से जुडे़ किसानों का आरोप है कि मवाना मिल के झुनझुनी एवं रहमापुर क्रय केंद्रों से भी बाट गायब है। मिल किसानों का जमकर शोषण कर रही है। इस संबंध में टिकौला मिल के डीजीएम ऋषिराज शर्मा का कहना है कि केंद्रों पर बाट पहुंच गए हैं चोरी होने के डर से इधर उधर रखे हो सकते हैं। दो दिन में सभी केंद्रों पर बाट पहुंच जाएंगे। डीसीओ मुजफ्फरनगर राजेश्वर धार द्विवेदी का कहना है कि बाट सेंटरों पर होना चाहिए। मिल प्रबंधन का ही बाट उपलब्ध कराने का जिम्मा है। यदि किसी सेंटर पर बाट नहीं हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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