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मेरठ में 12 लाख बच्चों को लगेगा रूबेला का टीका

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12 लाख बच्चों-किशोरों को लगेगा रूबेला का टीका
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मेरठ। स्वास्थ्य विभाग ने मिजिल्स रूबेला केटीकाकरण की तैयारी शुरू कर दी है। टीकाकरण के लिए मेरठ में करीब 12 लाख बच्चों और किशोरों को चिह्नित किया गया है। यह अभियान 24 या 26 सितंबर से शुरू किया जाएगा। इसमें नौ माह से 15 साल तक के बच्चे व किशोर शामिल किए जाएंगे।
रूबेला संक्रमण से होने वाली बीमारी है। इसमें हल्का वायरल संक्रमण होता है। रूबेला को कभी कभी जर्मन खसरा भी कहते हैं। हालांकि रूबेला वायरस का खसरा वायरस से कोई संबंध नहीं है। रूबेला का कोई प्रत्यक्ष इलाज नहीं है। रूबेला की जटिलताएं बच्चों की तुलना में वयस्कों में अधिक होती हैं। रोग का प्रमुख खतरा है कन्जेनिटल रूबेला सिंड्रोम, जो किसी महिला को गर्भावस्था के दौरान रूबेला संक्रमण होने पर यह संक्रमण विकसित हो रहे भ्रूण तक पहुंच सकता है। इससे बच्चों में बहरापन, आंखों की खराबी, हृदय संबंधी बीमारी आदि हो सकती है।
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क्या होते हैं इसके लक्षण
रूबेला के लक्षणों में शामिल हैं बुखार, मितली और प्रमुख रूप से गुलाबी या लाल चकत्तों के निशान। चकत्ते चेहरे पर निकलते हैं। नीचे की ओर फैलते हैं और एक से तीन दिनों तक रहते हैं। यह वायरस वायुजनित श्वसन के छींटों द्वारा फैलता है। संक्रमित व्यक्ति रूबेला केचकत्तों के निकलने के एक हफ्ते पहले भी और इसके पहली बार चकत्ते निकलने के एक हफ्ते बाद तक संक्रामक हो सकते हैं।

पहली बार किया गया शामिल
कई देशों में रूबेला टीके का प्रयोग 40 साल से अधिक समय से किया जा रहा है। टीके की एक खुराक जीवन भर प्रतिरक्षण प्रदान कर सकती है। भारत सरकार केस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण अभियान में इसे पहली बार शामिल किया जाएगा।

स्कूलों में चलाया जाएगा अभियान
मीजल्स रूबेला का टीका सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों आदि में दिए जाएंगे। इस अभियान के बाद एमआर का टीका नियमित टीकाकरण के तहत केतहत उपलब्ध होगा।
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पूरी तरह सुरक्षित है ये टीका
लालीपन, बुखार और शरीर में चकत्ता का होना जैसे लक्षण टीकाकरण के बाद देखने में आ सकता है। लेकिन इन लक्षणों से घबराएं नहीं, रूबेला का टीका पूरी तरह से सुरक्षित है। टीकाकरण अभियान की तैयारी चल रही है। - डॉ. विश्वास चौधरी, एसीएमओ
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