मेरठ। पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के प्रपोजल पर नेशनल मिशन ऑफ क्लीन गंगा प्रोजेक्ट ने कार्य करना शुरू कर दिया है। पहले चरण में काली नदी के किनारे ओडियन नाले पर 150 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाया जाएगा।
काली नदी में पहुंचना है स्वच्छ पानी
सरकार ने नेशनल मिशन ऑफ क्लीन गंगा प्रोजेक्ट में शहरों के नालों में बहने वाले गंदे पानी को ट्रीट करके नदियों में डालने और फसलों की सिंचाई में इस्तेमाल करने का निर्णय लिया। इसके लिए जल निगम से प्रपोजल तैयार कराए जा रहे हैं। जिसमें नालों पर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने हैं। ताकि नालों का पानी साफ होने के बाद ही नदियों तक पहुंचे। नदियां दूषित होने से बचें और पर्यावरण भी स्वच्छ रहे।
आबूनाला नहीं ओडियन का मांगा प्रपोजल
सरकार ने पूर्व में जल निगम से आबूनाला द्वितीय और ओडियन नाला पर दो अलग-अलग 210 एमएलडी क्षमता के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रपोजल तैयार कराया था। जिस पर सोमवार को दिल्ली में नेशनल मिशन ऑफ क्लीन गंगा प्रोजेक्ट के तहत मंथन हुआ। क्लीन गंगा प्रोजेक्ट से जुड़ी टीम में शामिल अधिकारियों ने जल निगम को पहले चरण में ओडियन नाले पर ही 150 एमएलडी क्षमता वाला सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रपोजल तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
दूषित हो गया भूगर्भ जल
शहर के कच्चे नाले और काली नदी में बहने वाले गंदे पानी से भूगर्भ जल भी दूषित हो गया है। जिसके परिणामस्वरूप काली नदी के किनारे विकसित गांवों में कैंसर जैसी बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं। भूगर्भ जल के खराब होने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) सख्त हो रहा है। विभागों को फटकार लगायी जा रही हैं। भूगर्भ जल में सुधार हो, इसके लिए गंदे पानी को साफ करने की योजना तैयार की जा रही हैं। सरकार करोड़ों रुपये से योजनाओं को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है।
अंतिम रूप की तैयारी
नेशनल मिशन ऑफ क्लीन गंगा योजना में फिलहाल ओडियन नाले पर 150 एमएलडी क्षमता वाला सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। जल निगम ने प्रपोजल को अंतिम रूप देने की तैयारी शुरू कर दी हैं। -मुन्ना सिंह, परियोजना प्रबंधक, जल निगम
खास बातें:
- नेशनल मिशन ऑफ क्लीन गंगा प्रोजेक्ट में किया जाएगा कार्य
- एनजीटी में लग चुकी है कई बार फटकार
- जल निगम दुरुस्त कर रहा है एसटीपी का प्रपोजल