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महाभारत के इतिहास पर हुई चर्चा

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महाभारत का नया नक्शा तैयार
मेरठ।
नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट द्वारा महाभारत को लेकर मिशन वासुदेव शुरू किया गया है। जिसके अंतर्गत महाभारत के इतिहास को वैज्ञानिक तथ्यों के साथ खंगाला जा रहा है और लिखा भी जा रहा है। इस श्रृंखला में महाभारत का पूरा नक्शा एनएसटी ने तैयार किया है। संस्था का दावा है कि इसमें बरनावा (बागपत) का लाक्षागृह वो लाक्षागृह नहीं है, जो कि महाभारत का है। वह लाक्षागृह देहरादून में है। सोमवार को संस्था अध्यक्ष प्रो. प्रियांक भारती ने इसकी जानकारी दी।
प्रियांक भारती ने कहा कि पिछले महीने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट उत्खनन शाखा से यह रिकार्ड मांगा था, कि उन्हें कहां-कहां महाभारत के साक्ष्य मिले हैं। जिसमें कुरुक्षेत्र की जानकारी मांगी गई थी। जिसके जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कहा किसी भी स्थल से उत्खनन के दौरान महाभारत का कोई भी साक्ष्य नहीं मिला और न ही कुरुक्षेत्र से महाभारत की पुष्टि होती है। वहीं सीसीएसयू विवि मेरठ व जिला अधिकारी कार्यालय मेरठ द्वारा आज तक भी महाभारत कालीन हस्तिनापुर को लेकर कोई भी जवाब नहीं दिया गया। एनएसटी द्वारा अन्य कई जगहों से जवाब के लिए सूचना के अधिकार का प्रयोग किया गया। लेकिन कहीं से भी साक्ष्यप्रद जवाब नहीं मिला। ऐसे में आवश्यकता है कि वेदव्यास कृत महाभारत को वैज्ञानिकता के आधार पर साक्ष्यों के साथ दोबारा लिखा जाए। जिससे कि वेदव्यास कृत महाभारत को बल मिले। वह महाकाव्य इतिहास और वैज्ञानिक ग्रंथ बन सके। उत्तर प्रदेश सरकार के साथ- साथ उत्तराखंड सरकार हिमाचल प्रदेश सरकार से भी इस कार्य में सहयोग मांगा गया है। जिसमें उत्तराखंड सरकार के संस्कृति मंत्रालय के मंत्री सतपाल महाराज ने मुलाकात के लिए बुलाया भी है।
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महत्वपूर्ण प्वाइंट
महाभारत वैज्ञानिक तथ्यों के साथ लिखना हुआ शुरू, जिसके अंतर्गत महाभारत का नक्शा हुआ तैयार
उत्तर प्रदेश सरकार डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को दिए हैं निर्देश
उत्तराखंड सरकार के संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने मिलने के लिए बुलाया
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने संस्कृ ति विभाग को दी जिम्मेदारी
यह शोध कार्य करने की मुख्य वजह बनी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का महाभारत को लेकर उचित जवाब न देना और सीसीएसयू मेरठ के रजिस्ट्रार का भी रहा नकारात्मक व्यवहार


खास बातें:
- नक्शे में खारिज हुआ बरनावा का लाक्षाग्रह
- आरटीआई में मांगी थी सूचना, नहीं मिली जानकारी
- जुलाई तक अंतरराष्ट्रीय जनरल में नक्शा प्रकाशित भी होगा।
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