बिजनौर। नगीना के भाजपा सांसद डाक्टर यशवंत सिंह के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दलित आरक्षण व एससीएसटी एक्ट में परिवर्तन के लिए लिखे गए पत्र से मामले में लिखे गए पत्र से जिले में सियासत गरमा गई है। चर्चाएं शुरू हो गई है कि कहीं यशवंत सिंह का भाजपा से मोहभंग तो नहीं हो गया, वह पाला बदलने की भूमिका तो नहीं बना रहे हैं। भाजपा में उनके पत्र को लेकर विरोध के सुर उठने शुरू हो गए हैं।
नगीना के भाजपा सांसद डा.यशवंत सिंह मूल रूप से मुजफ्फरनगर जिले के गांव चुड़ियाला के रहने वाले हैं। 2002 के विधानसभा चुनाव में वह मुजफ्फरनगर की जानसठ सुरक्षित सीट से विधायक बने थे। 2007 के चुनाव में रालोद को छोड़कर उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया और फिर से जानसठ सीट से विधायक बन गए। बसपा सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया। वेस्ट यूपी में मंत्री रहते हुए डा.यशवंत सिंह की खूब तूती बोली। 2014 के लोकसभा चुनाव से एक साल पहले बसपा को छोड़कर डा.यशवंत सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया । नगीना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की जुगत में लग गए। तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी से नजदीकियों के चलते डा.यशवंत सिंह ने भाजपा का टिकट पा लिया और नगीना से सांसद बन गए। नगीना से सांसद बनने के बाद डा.यशवंत सिंह का अपने क्षेत्र में कई बार विरोध हुआ। बसपा में रहने के दौरान जिस तरह वह काम कराते आए, भाजपा में ऐसे काम नहीं करा पाए। नगीना में रंग के जुलूस के दौरान हुए विवाद में भी सांसद की खूब किरकिरी हुई। कार्यकर्ता भी उनसे नाराज थे। भाजपा में विरोध बढ़ रहा था। कुछ लोग बताते हैं कि वह इस समय भाजपा में घुटन महसूस कर रहे हैं और विरोध करने का मौका तलाश रहे थे। दलितों के एससीएसटी एक्ट में बदलाव को लेकर हुए आंदोलन ने उन्हें भाजपा के खिलाफ आवाज उठाने का मौका दे दिया और वह पत्र लिखकर विदेश रवाना हो गए। पत्र कई दिन से वायरल हो रहा है, लेकिन न तो इसका खंडन नहीं किया गया और न ही उनकी ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया आई है।
आरके सिंह भी कर चुके हैं आवाज बुलंद
सांसद डाक्टर यशवंत सिंह के अलावा दलितों के जिले के मजबूत नेता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आरके सिंह ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दलितों के वर्गीकरण व एससीएसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बदलाव के विरोध में आवाज बुलंद की है। आरके सिंह भी जिले के दलितों के कद्दावर नेता हैं। उनकी पत्नी ओमवती कई बार विधायक, मंत्री व सांसद रह चुकी हैं। आरके सिंह भी लोकसभा चुनाव में अपनी पत्नी के लिए नगीना सीट से टिकट मांग रहे थे। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी को टिकट दिया पर ओमवती चुनाव हार गईं। आरके सिंह के भी भाजपा का दामन छोड़ किसी अन्य दल में जाने की चर्चा है, लेकिन आरके सिंह भाजपा को छोड़ने की बात को गलत बताते हैँ।
सांसद डा.यशवंत सिंह सभी जातियों के वोटों से सांसद बने हैं। केवल दलितों की बात कहकर उन्होंने जातिवाद को बढ़ावा दिया है। यह घटिया मानसिकता है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। महेंद्र धानौरिया, उपाध्यक्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश, भाजपा
डा.यशवंत सिंह ने केवल दलितों की बात की है, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। सांसद को सभी जातियों ने वोट दिया है। सांसद को अगर प्रधानमंत्री से बात करनी थी तो संपूर्ण हिंदुत्व के विकास और उत्थान की बात करनी थी। पुरुषोत्तम अग्रवाल, नगर अध्यक्ष, भाजपा