मेरठ। हापुड़ रोड़ स्थित मदरसा जामिया मदनिया में रविवार को दारुल कजा की बैठक आयोजित हुई। जिसमें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सलाहकार कमेटी ने मुस्लिम समुदाय की आपसी समस्याओं को लेकर चर्चा की।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मदरसा इमदादुल इस्लाम सदर बाजार के प्रधानाचार्य मौलाना महफूजुर्रहमान शाहीन जमाली ने कहा कि वर्तमान में जहां हर तरफ इस्लाम को लेकर लोगों में असमंजस पैदा किया जा रहा है, ऐसे मौके पर दारुल कजा का कयाम महत्व रखता है। इस्लाम सिर्फ शांति का पैगाम देता है, जिसका मकसद इंसान को समाज में बराबरी देना है। इसमें मुस्लिमों को न्याय दिलाने का काम होता है। बैठक में काजी-ए-शरीयत दारुल कजा मेरठ मो. हस्सान कासमी ने तीन माह की कारकर्दगी की रिपोर्ट पेश की और दारुल कजा की अहमियत को विस्तार से बताया।
दारुल कजा के कनवीनर कारी शफीकुर्रहमान कासमी ने बताया कि चंद दिनों में मुस्लिम लोगों ने काफी संख्या में अपने निजी मामलों में दारुल कजा की सलाहकार कमेटी से संपर्क किया। उन्होंने मुस्लिमों से आह्वान भी किया, कि वो दारुल कजा से अपने निजी मामलों को हल कराने के लिए लोगों को जागरूक करें। क्योंकि दारुल कजा ऐसा प्लेटफार्म है जहां शरीयत की रोशनी में पूरी निष्पक्षता एवं जिम्मेदारी के साथ परिवारों में समझौते कराने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुसलमानों के घरेलू मामले हल कराने के लिये मेरठ में दारुल कजा की स्थापना की।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि तलाक और शादियों में शरीयत के खिलाफ काम करने पर अंकुश लगे। बैठक में मुस्लिम समाज को शरीयत के मुताबिक जिंदगी गुजारने के लिये जल्द बड़े सम्मेलन करने पर विचार हुआ। बैठक में शेखुलहदीस मदरसा गुलजारे हुसैनिया अजराड़ा मौलाना अकीलुर्रहमान कासमी ने दुआ कराई। मौलाना मौ. अब्बास, मुफ्ती हसन, मौलाना मौ. नफीस, मौलाना आस मोहम्मद, सीसीएसयू से डॉ. असलम जमशेदपुरी, एडवोकेट अयाज अहमद, अनस सब्जवारी, कारी अफ्फान कासमी आदि बैठक में मौजूद रहे।
- दारुल कजा की बैठक में मुस्लिमों की समस्याओं पर हुई चर्चा