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भैसाली बस अड्डे की मिट्टी लोगों के लिये बन रही मुसीबत
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मेरठ। भैसाली बस अड्डे के सामने से निकलने के लिए जाम की मुसीबत तो थी ही अब ये धूल और कीचड की नई समस्या। अफसरों ने समस्या तो खड़ी कर दी अब इसका कोई समाधान नहीं सूझ रहा है। बारिश बंद होने के बाद भी भैसाली बस अड्डा कीचड़ से अटा पड़ा है।
बस अड्डे पर पानी भरने से यहां डाली गई मिट्टी कीचड़ में तब्दील हो गई। बसों के पहियों से मिट्टी दिल्ली रोड पर दोनों तरफ एक किलोमीटर तक फैल गई। रविवार को सड़क पर फैली मिट्टी उड़ती रही। धूल और मिट्टी के कारण दुकानदारों और सड़क पर चलने वालों का सांस लेना तक दूभर हो गया। वहीं बस अड्डे पर कीचड़ और पानी भरा होने पर यात्री अंदर तक नहीं जा सके। यात्रियों को बाहर सड़क पर ही बसों में बैठना पड़ा। इसके चलते दिनभर सड़क पर जाम लगा रहा। बस अड्डे के भराव के लिए डाली गई मिट्टी यात्रियों के लिए जी का जंजाल बन गई है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मिट्टी का समाधान नहीं किया जा रहा है। दुकानदारों को पूरे दिन मुंह पर कपड़ा बांधकर काम करना पड़ता है। रोडवेज अधिकारियों से इस बाबत शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा है।
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रोडवेज बस अड्डों का हल निकालने को बैठक आज
मेरठ। रोडवेज बस अड्डों का हल कोर्ट से बाहर निकालने की कवायद में जुटे एमडीए वीसी के यहां आज फिर इस मुद्दे पर बैठक होगी। गत बृहस्पतिवार को हुई बैठक में याचिकाकर्ता लोकेश खुराना और रोडवेज अधिकारियों के बीच तीखी नोंकझोंक होने के बाद परिणाम नहीं निकल सका था। वीसी ने दोनों पक्षों को सोमवार को फिर से बैठकर मामले का हल निकालने की बात कही थी।
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शहर के बीच आबादी के बीच आए भैसाली व सोहराबगेट बस अड्डों को मास्टर प्लान के मुताबिक शहर से बाहर करने के लिए आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने एनजीटी का दरवाजा खटखटाया हुआ है। वहीं शहर के जाने माने चिकित्सक डॉ. आरएन पाठक ने हाईकोर्ट में रिट दायर की थी। एनजीटी ने जहां एमडीए, रोडवेज से लेकर राज्य सरकार और प्रदूषण व वन एवं पर्यावरण विभाग से जवाब मांगकर कार्रवाई शुरू कर रखी है वहीं हाईकोर्ट ने भी गत 27 जुलाई को याचिकाकर्ता के प्रत्यावेदन पर रोडवेज को 8 सप्ताह के अंदर जवाब देने के आदेश दिए थे। रोडवेज को 27 सितंबर यानि बुधवार तक प्रत्यावेदन का जवाब देना है। एनजीटी और हाईकोर्ट में रोडवेज के साथ एमडीए की भी घेरेबंदी होनी है। क्योंकि बस अड्डों को शहर से बाहर भेजने के लिए जमीन की व्यवस्था एमडीए को ही करनी है। रोडवेज अधिकारियों ने भी पिछली बैठक में एमडीए द्वारा उपयोगी जमीन देने पर बाहर जाने की बात कही थी। लेकिन बैठक में याचिकाकर्ताओं और रोडवेज अधिकारियों के बीच गरमागरमी होने पर बैठक सोमवार तक के लिए टाल दी थी।
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