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जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव बन रहा संवेदनशील

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मेरठ। जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव संवेदनशील बनता जा रहा है। पिछले चुनाव के प्रत्याशियों और सदस्यों की अलग-अलग सोच की स्थिति टकराव की तरफ जाती नजर आ रही है। पूर्व के प्रत्याशी जहां पिछले चुनाव की डीलिंग को ही इस चुनाव में जारी रखने की सोच रहे हैं, वहीं सदस्य नये सिरे से दाम तय होने की उम्मीद में हैं।
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उपचुनाव 22 अगस्त को होना है। विपक्ष संयुक्त मोर्चा बनाकर फिलहाल डा. मनोज अधाना को प्रत्याशी घोषित कर चुका है। लेकिन भाजपा में घमासान मचा है। सदस्य मानकर चल रहे हैं कि इस बार भी धनबल का प्रयोग होगा। लेकिन पूर्व में चुनाव लड़े प्रत्याशियों की अलग ही सोच है। पिछला चुनाव जीतीं सपा नेता अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान को 18 वोट मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कुलविंदर सिंह को 16 वोट मिले थे। ऐसे में अब अतुल प्रधान जो गैर भाजपाई खेमे का नेतृत्व कर रहे हैं, वे इस चुनाव में अपने पिछले समर्थक सदस्यों पर संयुक्त मोर्चा प्रत्याशी के पक्ष में वोट करने का दबाव बनाएंगे।
दबाव की बड़ी रणनीति
विपक्ष हर कदम फूंक कर रख रहा है। सूत्रों की मानें तो पिछले चुनाव में क्रॉस वोट हुआ था। सपा खेमे ने अपनी जीत सुनिश्चित और क्रॉस वोट रोकने को खुफिया कैमरों के साथ ही लेनदेन की भी खुफिया रिकार्डिंग तैयार करायी थी। अब इस उपचुनाव में क्रॉस वोट करने वाले सदस्यों को ब्लैकमेल कर एक बार फिर से भाजपा को झटका देने का मंसूबा विपक्षी खेमा बना रहा है।
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भाजपा में आपसी रार बनेगी मुसीबत
भाजपा में इस समय प्रत्याशी चयन को लेकर बड़ी रार है। इस बार कुलविंदर के साथ ही डॉ. मीनाक्षी भराला और रोहताश पहलवान खुलकर पैरवी कर रहे हैं। जबकि भाजपा में पांच खेमे खड़े हो गए हैं। भाजपा की तीन सदस्यों के लिए जहां अलग-अलग नेतृत्व से पैरवी हो रही है, तो दो विधायक गैर भाजपाई सदस्यों को चुनाव लड़ाने की वकालत कर रहे हैं। दोनों ने अपने-अपने चहेते सदस्यों का नाम भी आगे बढ़ा दिया है। ऐसे में खुले तौर पर शुरू हुई यह गुटबाजी जहां चुनाव में भाजपा के आक्रामक तेवर ढीला करेगी, वहीं एकजुटता के अभाव में चुनावी रणनीति को भी प्रभावित करेगी।
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खास बात
- जिला पंचायत अध्यक्ष उपचुनाव :
- दावेदार चाहते हैं समर्थन बरकरार, सदस्य नए सिरे से वोट के दाम
- पूर्व में चुनाव लड़े प्रत्याशी अब अपने समर्थक प्रत्याशी पर बनाएंगे दबाव
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