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Meerut News: गंगा की गोद में पहुंचकर 1633 कछुए बनेंगे स्वच्छता के प्रहरी

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मखदुमपुर गंगा घाट पर कछुआ विमोचन कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी व अन्य स्रोत
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मखदूमपुर में गंगा में छोड़े गए कछुओं के शावक
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर (मेरठ)। गंगा को स्वच्छ और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में मखदूमपुर गंगा घाट पर वन विभाग, नमामि गंगे और (विश्व प्रकृति निधि) की संयुक्त टीम ने कछुआ संरक्षण की अहम पहल की है। अभियान के तहत सोमवार को मखदूमपुर गंगा घाट पर 1633 कछुआ शावकों काे सुरक्षित गंगा में छोड़ा गया।
वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय ने बताया कि गंगा में 41 बाटागुर ढोंगोका, 944 पैंगशुरा स्मिथी और 648 पैंगशुरा टेंटोरिया प्रजाति के शावकों को छोड़ा गया। गंगा की गोद मिलते ही कछुए के शावक अठखेलियां करते नजर आए। डीएफओ वंदना फोगाट ने बताया कि गंगा किनारे हैचरी लगाकर कछुओं के अंडों को संरक्षित किया गया। समय अनुसार जब अंडों से बच्चे निकल आए तो उन्हें सामाजिक वानिकी प्रशिक्षण केंद्र में बने अत्याधुनिक तालाब में रखा गया। जब वह गंगा में तैरने की स्थिति में हुए तो उनको गंगा में छोड़ दिया गया है। ये प्रजातियां गंगा की स्वच्छता और संतुलित पारिस्थितिकी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। कछुए जल में मृत जैविक अवशेषों को खाकर गंगा को स्वच्छ रखने में सहायक होते हैं। इसी कारण कछुआ संरक्षण को गंगा पुनर्जीवन कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
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वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कछुआ संरक्षण अभियान वर्ष 2013 में प्रारंभ हुआ। अब तक लगभग 16 हजार कछुओं से अधिक का संरक्षण कर गंगा नदी में छोड़ा गया है। इस मौके पर आमजन को कछुआ संरक्षण और गंगा की जैव विविधता बचाने को लेकर जागरूक भी किया गया।इस अवसर पर नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रियांक भारती, ऋषिपाल मालिक, सुनील पोसवाल सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
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