बागपत)। शूटर दादी के नाम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकीं जौहड़ी गांव की बुजुर्ग निशानेबाज चंद्रो तोमर ने कहा कि अपराजिता अभियान महिलाओं को एकसूत्र में बांधेगा। अभियान बेटी को उसके हक की लड़ाई लड़ने का हौसला देगा। साथ भी किताबी ज्ञान के अलावा इस अभियान से बेटी को कानून और समाज की जानकारी मिल भी सकेगी।
शनिवार को शूटर दादी ने जौहड़ी गांव में अमर उजाला के अनूठे अभियान ‘अपराजिता : 100 मिलियन स्माइल्स’ का पोस्टर लांच किया। उन्होंने कहा कि महिला समाज और परिवार की ताकत होती है। बेटे और बेटी में कोई फर्क नहीं होता है। पहले महिलाओं को ही अपने घर से बेटे और बेटी के फर्क को मिटाना होगा। बेटे और बेटी की परवरिश का पैमाना एक जैसा रखना होगा। उन्होंने कहा समाज के हर व्यक्ति को बेटे और बेटी को समान शिक्षा, समान अधिकार देने होंगे। दोनों की बातों को प्राथमिकता के साथ सामाजिक रूप से देना होगा। उन्होंने कहा हर महिला को खुद भी अपनी ताकत पहचाननी होगी और तब उसके साथ पूरा समाज कारवां बनकर खड़ा होगा। यदि महिलाएं ही बेटे और बेटी में फर्क करेगी तो समाज का क्या कुसूर। उन्होंने कहा शिक्षा अलग चीज है और संस्कार अलग। यह जरूरी है कि बेटी को रोक टोक करने के बजाए सही गलत बताएं और संस्कार दें। उन्होंने कहा महिलाओं के पास अपराजिता अभियान से बेहतर मौका है, महिलाएं इस अभियान से जुड़ें और अपने अधिकारियों के प्रति जागरूक बनें। उन्होंने कहा हौसला दिखाने से सारी मुश्किलें खत्म हो जाती है।
ऐसी हैं दादी चंद्रा तोमर
बागपत। जौहड़ी गांव की रहने वाली शूटर दादी चंद्रो तोमर का जन्म शामली जिले के मखमूलपुर गांव में हुआ था। गांव जौहड़ी में खोली गई शूटिंग रेंज में अपनी पोती को लाने और ले जाने के दौरान 60 साल से अधिक की उम्र में दादी ने निशानेबाजी देखी। इसके बाद यहीं निशानेबाजी सीखी और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते। इंडिया गोट टैलेंट, सत्यमेव जयते समेत अन्य कार्यक्रमों में शामिल हो चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हैं। निर्माता निर्देशक अनुराग कश्यप शूटर दादी के संघर्ष और हौसले पर वुमनियां नाम की फिल्म बना रहे हैं।