डिग्री कालेज निर्माण में जमीन का अड़ंगा
हस्तिनापुर में डिग्री कालेज निर्माण के लिए दी पांच एकड़ जमीन वन विभाग की निकली
- अब प्रशासन दूसरी जगह ढूंढ रहा जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। हस्तिनापुर में राजकीय डिग्री कालेज का निर्माण होना है लेकिन जमीन की उपलब्धता अड़ंगा बनी हुई है। प्रशासन ने जो जमीन पहले चिन्ह्ति की, वह वन विभाग की निकली। जब वन विभाग ने अड़ंगा लगाया तो प्रशासन ने दूसरी जगह जमीन तलाश शुरू की। अब जो जमीन मिल रही है, वह कस्बे से बाहर है जिसे लेकर मामला फंसा हुआ है।
प्रदेश सरकार ने हस्तिनापुर में राजकीय डिग्री कालेज स्वीकृत किया है। जिसके निर्माण के लिए बजट भी स्वीकृत हो चुका है। इस डिग्री कालेज निर्माण के लिए करीब पांच एकड़ जमीन की जरूरत है। शासन से दिशा निर्देश प्राप्त होने के बाद मवाना तहसील प्रशासन ने जमीन की तलाश करते हुए कस्बे के भीतर ही करीब पांच एकड़ जमीन चिन्हित कर दी लेकिन यह नहीं देखा कि जमीन वन विभाग की है। जमीन के हस्तांतरण की संभावना न होती देख प्रशासन ने फिर से तलाश शुरू की। कई जगह जमीन देखी गई, लेकिन कालेज के लिए उपयुक्त जमीन कहीं नहीं मिली। पिछले सप्ताह तहसीलदार के नेतृत्व में टीम ने हस्तिनापुर में जमीनों का रिकार्ड खंगाला और जीआईसी के कृषि फार्म के लिए सुरक्षित जमीन को चिन्हित करते हुए डिग्री कालेज को देने की कवायद चल रही है।
दूसरी ओर तहसील सूत्रों का कहना है कि राजकीय कन्या इंटर कालेज निर्माण में भी वन विभाग की जमीन को दे दिया गया था। जिसका वन विभाग ने विरोध भी दर्ज कराया था, लेकिन तब शासन के हस्तक्षेप से मामला सुलझ गया था और कालेज निर्माण का रास्ता साफ हो गया था। लेकिन इस बार वन विभाग ने स्पष्ट इन्कार कर दिया। वहीं राजकीय इंटर कालेज के फार्म हाउस की जिस जमीन को चिन्ह्ति करने की बात तहसील प्रशासन कर रहा है, वह कस्बे के बाहर बतायी जा रही है। ऐसे में डिग्री कालेज निर्माण में जमीन की भौगोलिक स्थिति आडे़ आ सकती है।
वर्जन.......
हमने जमीन देख ली है, राजकीय इंटर कालेज का कृषि फार्म की जमीन डिग्री कालेज निर्माण के लिए पर्याप्त है और कस्बे से इतनी दूर भी नहीं है कि बड़े बालक यहां पढ़ने न आ सकें।
-अशोक कुमार, तहसीलदार मवाना