एससीएसटी एक्ट: कानून पर सियासत, कौन गलत, कौन सही
सहारनपुर। एससी, एसटी एक्ट के तहत जिले में जनवरी से अब तक हत्या, दुष्कर्म, अपहरण, गंभीर चोट एवं अन्य मारपीट के 54 मामले दर्ज हुए हैं। जिनमें 16 मामले ऐसे मिले जो जांच के बाद या तो खारिज कर दिए गए या फिर उनमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई।
इन मामलों में दो मामले हत्या के, छह मामले दुष्कर्म के, दो मामले गंभीर चोट के, दो मामले अपहरण के और 42 मामले मारपीट एवं अन्य प्रकार के हैं। जिनमें से दुष्कर्म, गंभीर चोट एवं अपहरण के एक-एक मामलों में एफआर लग चुकी है। मारपीट के छह मामलों में एफआर लग चुकी है, जबकि सात मामले खारिज कर दिए गए। परिक्षेत्र के तीनों जिलों में इस एक्ट के तहत 126 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें 27 मामले ऐसे मिले जो जांच के बाद खारिज हो गए या फिर उनमें एफआर लगाई गई।
केस एक
सहारनपुर के बड़गांव थाना क्षेत्र के एक गांव में पिछले माह ही ऑनर किलिंग में युवती के पिता को जेल भेजा गया है। पिता ने युवती की हत्या इसलिए की थी क्योंकि युवती शादी नहीं करना चाहती थी। 2015 में उसने गांव के ही चाचा भतीजा समेत चार लोगों पर एससी, एसटी एक्ट के तहत दुष्कर्म का आरोप लगाया था। बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया और कोर्ट ने आरोपियों को बरी कर दिया था।
केस दो
रामपुर मनिहारान कस्बे के ही हरविंदर पर एससी, एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जांच के बाद मामला फर्जी निकला। जिस पर मामले को खारिज कर दिया गया। इसके अलावा पिछले सप्ताह रामपुर मनिहारान में ही गुर्जर और दलित समाज के लोगों पर छात्राओं से छेड़छाड़ को लेकर जमकर संघर्ष हुआ।
- सहारनपुर परिक्षेत्र में इस साल अब तक एससी, एसटी एक्ट के तहत दर्ज हुए और उनमें हुई कार्रवाई
मामले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली
हत्या 2 4 3
बलात्कार 6 (एक एफआर) 3 1 (एक एफआर)
अपहरण 2 (एक एफआर) 6 (3 एफआर) 3 (एक एफआर)
गंभीर चोट 2 (एक एफआर) -- ----
मारपीट एवं अन्य 42 (6 एफआर सात खारिज) 35 17 (3 एफआर, 3 खारिज) - सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या संविधान एवं न्याय परक
सहारनपुर अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश अग्रवाल का कहना है कि एससी, एसटी एक्ट के संबंध में जो व्याख्या उच्चतम न्यायालय ने की थी वह संविधान एवं न्याय परक थी। फौजदारी कानून की यह एक सामान्य व्याख्या है कि किसी भी व्यक्ति को एफआईआर की जांच किए बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। राजनीतिक दलों ने केवल तुष्टिकरण के आधार पर इस निर्णय को पलटने के लिए संशोधन पारित कराने में न्याय के विपरीत कार्य किया है। जिसका किसी भी अवस्था में समर्थन नहीं किया जा सकता।
- संशोधन स्वागत योग्य है
अधिवक्ता स्वराज सिंह का कहना है कि उच्च वर्ग काफी समय से शोषित वर्ग का शोषण करता चला आ रहा है। 70 वर्ष बाद भी दलित वर्ग पर अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। एससी, एसटी एक्ट में संशोधन स्वागत योग्य है। इसके सही उपयोग से दलित, शोषित वर्ग पर अत्याचार कम होंगे।
- संशोधन सामाजिक स्तर पर उपयुक्त
युवा अधिवक्ता तुषार का कहना है कि एससी एसटी एक्ट में जो संशोधन उच्चतम न्यायालय के बाद किया गया है वह सामाजिक स्तर पर युक्तियुक्त है। इससे वंचित समाज में आत्मनिर्भरता की भावना का उदय होता है। इसके साथ ही एससी, एसटी समुदाय की जिम्मेदारी है कि वे इस एक्ट का दुरुपयोग न होने दें।
भाजपा की राजनीतिक चाल है संशोधन
- अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष केके शर्मा का कहना है कि एससी, एसटी एक्ट में कोर्ट का निर्णय सही था। लेकिन भाजपा ने इसमें राजनीतिक चाल चली है। जिससे समाज की व्यवस्था को छिन्न भिन्न कर दिया है। सवर्णों और दलितों को आमने-सामने कर दिया है। समाज में विग्रह की स्थिति बन गई है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे दूरगामी परिणाम भयंकर होंगे।