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गोलीकांड से सवालों में स्टेडियम की सुरक्षा व्यवस्था

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गोलीकांड से सवालों में स्टेडियम की सुरक्षा व्यवस्था
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मेरठ। कैलाश प्रकाश स्टेडियम में कोच को गोली मारने की घटना हो गई और आरोपी आसानी से फरार भी हो गए। यह घटना स्टेडियम की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
एथलेटिक कोच संदीप रंधावा को युवकों द्वारा गोली मारने का मामला स्टेडियम की सुरक्षा में कहीं न कहीं लापरवाही दर्शाता है। करीब एक साल पहले क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आले हैदर आए तो उन्होंने इस अव्यवस्था को देख आई कार्ड व्यवस्था शुरू कराई। वे स्वयं गेट पर मौजूद रहकर खिलाड़ियों के आई कार्ड चेक करने लगे। इस दौरान कई फर्जी खिलाड़ी स्टेडियम में प्रेक्टिस करते मिले और कुछ के बैगों से प्रतिबंधित दवाईयां भी मिलती। इस चेकिंग से बाहरी खिलाड़ी का आना काफी हद तक कम हो गया था। लेकिन लापरवाही होने से फिर से अवैध रूप से बाहरी लोगों और खिलाड़ियों का आना शुरू हो गया। व्यवस्था में लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगर लगातार तलाशी होती तो कोच को गोली मारने वाले फर्जी खिलाड़ियों को स्टेडियम के अंदर हथियार लाना संभव नहीं हो पाता। इस घटना के बाद वहां आने वाले खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मुख्य रूप से महिला खिलाड़ियों के परिजनों को इस घटना ने सोचने पर मजबूर कर दिया है।
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दीवारों से कूदकर आते हैं बाहरी
स्टेडियम में बाहरी छात्रों का आना आसान है। स्टेडियम के कर्मचारियों के मुताबिक जब स्टेडियम में चेकिंग होती है तो बिना रजिस्ट्रेशन वाले खिलाड़ी दीवार कूदकर स्टेडियम से भाग जाते हैं। एक दो दिन बाद फिर से आने लगते हैं। स्टेडियम में डीएफओ दफ्तर के पास कोने पर स्वीमिंग पूल के पीछे दीवार पर लगी ग्रिल टूटी है। वहीं, पीछे की तरफ भी कई जगहों से ग्रिल व गेट टूटे हुए हैं। जहां से बाहरी और फर्जी खिलाड़ी स्टेडियम में पहुुंच जाते हैं। चेकिंग के दौरान वहीं से कूदकर निकल जाते हैं। स्टेडियम में मारपीट, अभद्रता की शिकायतें सामने आती रहीं हैं।
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लगने थे सीसीटीवी कैमरे
स्टेडियम में छेड़छाड़ से लेकर होने वाली चोरी की घटनाओं को लेकर स्टेडियम में 20 से अधिक कैमरे अनेक स्थानों पर लगाए जाने थे। स्टेडियम की ओर से कैमरे लगाने का प्रस्ताव भी उच्च अधिकारियों को भेजा गया। लेकिन प्रशासन ने यहां कैमरों का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया और आज तक कैमरे नहीं लग सके। स्टेडियम में कैमरे लगने से सुरक्षा को कहीं न कहीं बढ़ावा मिलेगा और हर कोने में प्रत्येक खिलाड़ी पर नजर हो सकेगी।

खास बातें:
- पहले शुरू हुई थी आईकार्ड की व्यवस्था, सामने आए थे अनेक फर्जी खिलाड़ी
- लचर व्यवस्था के चलते नहीं हुई तलाशी, अगर होती तो न होती गोलीबारी की घटना
- स्टेडियम की बाउंड्री से टूटी हैं ग्रिल, दीवार कूदकर घुस आते हैं बाहरी लोग
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