मेरे होठों पे जिंदाबाद हिंदुस्तान रह जाए
दिले बीमार सही हो वो दवाएं दे दे, मैं सब पर प्यार लुटाऊं वो दुआएं दे दे, ऐ मेरे रब मैं सांस-सांस में महक जाऊं, मेरी आवाज की खुशबू को हवाएं दे दे। गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना की इन लाइनों पर पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मेला बूढ़ा बाबा में मंगलवार देररात शुरू हुआ कवि सम्मेलन तड़के तक चला। इस दौरान श्रोता कवियों को सुनने के लिए अपनी कुर्सियों पर जमे रहे।
डॉ. सक्सेना से पहले हास्य कवि विनोद पांडेय ने बाजारवाद पर तंज कसा। उन्होंने पढ़ा, बाबा रामदेव जी की जब से दुकान खुली, बड़े-बड़े लोग ही बगल झांकने लगे, निकल गया है तेल डाबर के तेल का, कोलगेट वाले खुद दांत मांजने लगे। वहीं शंभू शिखर ने पढ़ा कि जब तक नहीं आते हैं 15 लाख खाते में, तब तक तुम्हें मोदी हम जिताते रहेंगे। कवि सुमरेश सुमन ने देशभक्ति की गंगा बहायी। उन्होंने पढ़ा, तिरंगे का निशा मुझे भी तो मयस्सर हो, मेरे होठों पे जिंदाबाद हिंदुस्तान रह जाए। वहीं कुंवर जावेद ने पढ़ा कि कोई हिंदुत्व कि इस्लाम न पूछा जाए, मरने के बाद का अंजाम न पूछा जाए। इसके अलावा कवि सुल्तान सिंह सुल्तान ने अपने गीत के माध्यम से मेरठ के अमर क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी।