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दावों में माहिर भाजपाई दबाव बनाने में रहे बेअसर

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मेरठ। स्मार्ट सिटी का मुद्दा भाजपा के गले की फांस बन गया है। केंद्र और प्रदेश में अपनी सरकार होने के बावजूद मेरठ के जनप्रतिनिधि और नेता मेरठ शहर को स्मार्ट सिटी में चयनित नहीं करा पाए। इस मामले में हुई किरकिरी पर अब भाजपाई अधिकारियों पर अपनी नाकामी का ठीकरा फोड़ रहे हैं। जबकि स्थिति ये है कि यह मामला लोकसभा चुनाव में मुद्दा बनकर भाजपा को घेर सकता है।
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स्मार्ट सिटी को लेकर मेरठ का दावा धरातल पर भले ही शुरू से मजबूत नजर आया हो। लेकिन पहले ही चरण से पैरवी के मामले में मेरठ पूरी तरह पिछड़ा नजर आया। सपा सरकार में जब मेरठ को आखिरी पायदान पर रखा गया तो भाजपाइयों ने जमकर हल्ला मचाया और सपा सरकार पर पक्षपात के आरोप लगाए। लेकिन इस बार तो प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी। लेकिन बावजूद इसके मेरठ फिर दरकिनार कर दिया गया।
सारे धुरंधर फेल
भाजपा पर अगर नजर डालें तो जनपद में चार सांसद मेरठ नगर निगम की पैरवी करने के लिए मौजूद हैं। क्योंकि मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल सहित बिजनौर, मुजफ्फरनगर और बागपत जो कि नगर पालिका हैं, उनके लिए कुछ नहीं है, ऐसे में उनके लोकसभा क्षेत्र में मेरठ की एक-एक विधानसभा आने के कारण यदि सभी मिलकर संयुक्त प्रयास करते हुए दबाव बनाते तो परिणाम कुछ और हो सकता था। लेकिन चारो सांसदों के बीच समन्वय की कमी यहां साफ नजर आयी। यही नहीं, मेरठ की सात विधानसभा सीटों में से छह पर भाजपा के विधायक हैं। शहर विधानसभा में भले ही सपा के विधायक हों। लेकिन इस सीट पर राजनीति करने वाले डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी पूर्व प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते असर डाल सकते थे। साथ ही प्रदेश से लेकर पश्चिमी क्षेत्र तक और संघ परिवार में भी मेरठ का प्रतिनिधित्व मजबूत है। बावजूद इसके सारे धुरंधर मेरठ को स्मार्ट सिटी में चयनित कराने में फेल रहे।
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ठीकरा अधिकारियों के सिर
इस मामले में भाजपाई अब नाकामी का ठीकरा पूरी तरह नगर निगम अधिकारियों पर फोड़ रहे हैं। लेकिन इस बात को कोई स्वीकार नहीं कर रहा कि मेरठ में आपस में बंटे भाजपाई स्मार्ट सिटी मुद्दे पर भी बंटे नजर आए और जब भी इसे लेकर कोई अभियान छिड़ा तो सबने अपने-अपने खेमे तैयार कर लिए।
लोकसभा चुनाव में घिर सकती है भाजपा
स्मार्ट सिटी का मुद्दा शहर की जनता के लिए अहम है। जिस तरह भाजपाई इसमें नाकाम हुए हैं, उसे लेकर विपक्षी दल भाजपा को लोकसभा चुनाव में घेर सकते हैं और जनता भी सवाल खड़े कर सकती है। अब यह चिंता भाजपाइयों को भी सताने लगी है।
सांसद ने लिखा नगर विकास मंत्री को पत्र
स्मार्ट सिटी मुद्दे पर सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि स्मार्ट सिटी कोटे के तहत प्रदेश के 13 नगरों के सापेक्ष अभी 10 नगरों का ही चयन हुआ है। पहले उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार के समय राजनीतिक पक्षपात के चलते मेरठ अपने अधिकार से वंचित रह गया था। मेरठ इस बार भी स्मार्ट सिटी बनने का गौरव प्राप्त नहीं कर सका है। सांसद ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपना प्रदेश है। इस कारण उत्तर प्रदेश के साथ केंद्र सरकार विशेष पक्षपात न करे तो भी प्रदेश को उसका निर्धारित कोटा तो मिलना ही चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरठ के स्मार्ट सिटी की रिपोर्ट विशेषज्ञों ने तैयार की थी और नगर विकास मंत्रालय ने भी चयन योग्य माना था।
यह खूबियां गिनाईं
सांसद ने कहा कि मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण और 20 लाख की आबादी वाला महानगर है। जो अपने खेल उद्योग, स्वर्ण आभूषण, कैंची और हैंडलूम आदि को लेकर विख्यात है। ऐसे में स्मार्ट सिटी में चयनित न होने पर महानगर की जनता हतप्रभ है। इसलिए 13 महानगर के कोटे को ध्यान में रखते हुए मेरठ को स्मार्ट सिटी में चयनित कराया जाए।
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खास बातें:
- भाजपा के गले की फांस बना स्मार्ट सिटी का मुद्दा
- अपनी विफलता छिपाने को अधिकारियों के सिर फोड़ रहे ठीकरा
- लोकसभा चुनाव में इस मुद्दे पर जनता के बीच घिर सकती है भाजपा
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