इमरजेंसी के सन्नाटे को संघ ने तोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा रविवार को शंकर आश्रम स्थित संघ कार्यालय में कार्यकर्ता मिलन समारोह आयोजित किया गया। इसमें जनसंघ कालीन संघ परिवार के नेताओं ने अपने विचार रखे। इस मौके पर आरएसएस के क्षेत्र संघ चालक डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा ने कहा कि 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपात काल (इमरजेंसी) का सन्नाटा संघ परिवार ने तोड़ा था।
रविवार को 1975 में घोषित आपात काल के विरुद्ध संघर्ष में जेल जाने वाले कार्यकर्ताओं का ‘कार्यकर्ता मिलन’ आयोजित हुआ। इसमें डॉ. दर्शन लाल अरोड़ा ने आपात काल के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि 25 जून 1975 को आपात काल की घोषणा के साथ ही इंदिरा गांधी द्वारा राजनीतिक और वैचारिक विरोधियों तथा संगठनों के खिलाफ दमन चक्र चला दिया था। देश में प्रजातांत्रिक मूल्यों व प्रावधानों को समाप्त कर दिया गया। इस आपातकालीन व्यवस्थाओं के विरुद्ध एक विशाल आंदोलन प्रारंभ हुआ। जिसमें संघ ने प्रमुखता से भूमिका निभाई। अंत में संघ ने पूरे देश में सत्याग्रह करके गिरफ्तारी देने का निर्णय लिया। पूरे राष्ट्र विशेष कर उत्तर भारत में लगभग 70 हजार स्वयंसेवकों ने गिरफ्तारियां दी थीं। जिसमें अधिकांश गिरफ्तारियां मीसा और डीआईआर कानून के अंतर्गत की गई।
मुख्य वक्ता अशोक बैरी ने कहा कि आपात काल के अत्याचारों के कारण पूरे देश में निराशा फैल गई थी। संघ ने अपनी रचना नगर, जिला, प्रांत के अनुसार जनजागरण की योजना बनाई। समाज को इस आपात काल तथा सरकार के अत्याचारों की जानकारी देने के लिये अनेक प्रकार के पत्र एवं पत्रिकाओं को गुप्त रूप से जनता तक पहुंचाया। अंत में सरकार को आपात काल हटाना पड़ा।
इस अवसर पर उपस्थित लोकतंत्र सेनानियों का अभिनंदन करने के साथ ही 25 फरवरी 2018 को होने वाले विशाल राष्ट्रोदय कार्यक्रम की वेबसाइट का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में आपात काल में जेल जाने वाले रविंद्र नादर, हरिश्चंद्र जन्मजेय चौहान, राजेंद्र अग्रवाल, प्रदीप कंसल, वासुदेव शर्मा, अरुण वशिष्ठ, राजेश, राकेश जैन, रणजीत सिंह, सुधाकर, पदमाकर, अमरजीत, राकेश महाजन, सर्वेश नंदन, रामभरोसे, महावीर रस्तोगी समेत करीब 50 लोगों ने अपने अनुभव साझा किए।
खास बात
आरएसएस के कार्यकर्ता मिलन में संघ नायकों ने रखे विचार
25 फरवरी को होने वाले राष्ट्रोदय कार्यक्रम की वेबसाइट की लांच