मेरठ। एक तरफ दवाओं की किल्लत की वजह से मेडिकल अस्पताल में बखेड़े हो रहे हैं, वहीं मेडिकल अस्पताल जीएसटी नंबर तक नहीं ले सका है। इस कारण यहां दवाओं की सप्लाई अटक गई है। अब जीएसटी नंबर के लिए आवेदन किया गया है।
मेडिकल अस्पताल में दवाओं, एक्सरे-एमआरआई फिल्म आदि की छह माह से ज्यादा से किल्लत चल रही है। मेडिकल अस्पताल प्रबंधन ने पिछले दिनों 15 करोड़ रुपये के बजट की मांग शासन से की थी, जबकि दवाओं का ढाई करोड़ रुपये इन पर उधार था। पिछले दिनों 1.70 करोड़ रुपये शासन से मिले थे, जिनसे पिछली उधारी चुकाई गई। हालांकि अभी 80 लाख रुपये उधार बाकी हैं। अब 70 लाख रुपये की दवाइयां मंगाने के लिए दवा कंपनियों को मांग पत्र आदेश (इंडेंट आर्डर) भेजा गया था। लेकिन जीएसटी नंबर नहीं होने के कारण दवाइयां नहीं आ सकीं। क्योंकि अब बिना जीएसटी नंबर के सरकारी अस्पतालों में भी दवाइयों की सप्लाई नहीं हो सकती है।
इस संबंध में मेडिकल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सचिन कुमार ने बताया कि जीएसटी नंबर के लिए कोशिश जारी है। इसके बाद ही दवाइयां आने का रास्ता साफ हो सकेगा। उन्होंने बताया कि मेडिकल में कर्नाटक, मुरादाबाद और हरिद्वार आदि जगह से दवाइयां आती हैं। गौरतलब है कि मंगलवार और बुधवार को दवाओं की कमी की वजह से मेडिकल अस्पताल में हंगामा और मारपीट हो चुकी है। इससे पहले सीएमओ कार्यालय के दवा विभाग ने भी जीएसटी नंबर नहीं लिया था, जिस कारण वहां भी दवाइयों की सप्लाई अटक गई थी। हालांकि अब वहां जीएसटी नंबर लिया जा चुका है।
खास बात
- बिना जीएसटी नंबर नहीं हो सकती दवाइयों की सप्लाई
- मेडिकल अस्पताल में किल्लत की वजह से लगातार हो रहे बखेड़े