पड़ताल: असफलता - एक
ऐसे तो नहीं बन पाएंगे हम स्मार्ट
- स्वच्छ भारत मिशन को लगा रहा निगम पलीता
- पहले पांच जून को, अब एक जुलाई से भी नहीं शुरू होगी डोर टू डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था
इंट्रो : ऐसे तो न हम स्मार्ट होंगे और न ही अपना मेरठ स्मार्ट सिटी बन पाएगा। नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली ही ऐसी है। नगर निगम अधिकारी केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं पर काम ही करने को तैयार नहीं है। स्वच्छ भारत मिशन को पूरी तरह पलीता लगाया जा रहा है। जहां शहर में शत प्रतिशत शौचालय तक नहीं बन पाए हैं वहीं शहर को स्वच्छ करने में निगम प्रशासन पूरी तरह फेल साबित है। केन्द्र सरकार के सर्वे की मूल्यांकन रिपोर्ट ही वास्तविकता वयां कर रही है। लापरवाही का ही परिणाम है कि मेरठ स्मार्ट सिटी की परीक्षा में बार बार फेल हो रहा है। अब सवाल है कि ऐसी व्यवस्थाओं में मेरठ को स्मार्ट सिटी में शुमार करने की मुहिम भला कैसे पूरी हो सकेगी?
राजकुमार सैनी
मेरठ। स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरे देश में डस्टबिन वितरण, डोर टू डोर कूड़ा उठाने की प्रक्रिया पर्यावरण दिवस यानी पांच जून से शुरू की जानी थी। मेरठ की मलिन बस्ती लल्लापुरा से नगर निगम ने डस्टबिन वितरण की औपचारिकता पूरी की। अगले दिन यानी छह जून से लल्लापुरा में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में डोर टू डोर कूड़ा उठाने की प्रक्रिया शुरू होनी थी। जो निगम अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ गयी। अगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मंशा पर गौर करें तो निगम अधिकारियों ने ही मोदी की मंशा पर पूरी तरह पानी फेर दिया है। अभी तक न तो डस्टबिन खरीद हो पायी है और न ही डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाली कंपनी से शुल्क तय हुआ है। जिसके कारण एक जुलाई से डोर टू डोर कूड़ा उठान संभव होता नहीं दिख रहा है।
योगी की मंशा पर भी फिर सकता है पानी
केन्द्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना का लाभ मेरठ को दिलाने के लिए अब उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगे आ गए हैं। मंगलवार को उन्होंने लखनऊ में मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाने का बयान दिया। जिसके बाद मेरठ की जनता को उम्मीद जगी। लेकिन नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली को देखकर महानगर की जनता को विश्वास नहीं हो रहा है कि मेरठ स्मार्ट सिटी बन पाएगा। क्योंकि नगर निगम में स्मार्ट सिटी के बिंदुओं पर धरातल पर कार्य नहीं दिखाई दे रहा है।
न डस्टबिन खरीदे, डोर टू डोर कंपनी से विवाद
नगर प्रशासन ने पर्यावरण दिवस पर जनता से वादा किया था कि एक जुलाई से शहर में डस्टबिन बांटने के साथ साथ डोर टू डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था शुरू करायी जाएगी। घरों का कूड़ा सड़कों पर दिखाई ही नहीं देगा। निगम अधिकारियों का यह वादा कितना सही साबित होगा यह तो दो दिन बाद यानी एक जुलाई को साफ हो जाएगा। अभी तक शहर का हाउस होल्ड सर्वे भी नहीं किया गया है। इसी से माना जा सकता है कि नगर निगम स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी को लेकर कितना गंभीर है।
स्मार्ट सिटी के इन बिंदुओं पर पास होना जरूरी
- स्वच्छ हो शहर, सड़कों पर न दिखाई दे कूड़ा, -- रिपोर्ट शून्य,
- घर-घर में हो डस्टबिन, डोर टू डोर उठे कूड़ा, -- रिपोर्ट शून्य,
- शहर के कूड़े का हो निस्तारण, पर्यावरण दूषित न हो,-- रिपोर्ट शून्य,
- नगर निगम की आय नहीं होनी चाहिए कम, -- रिपोर्ट में कोई सुधार नहीं,
- शहर के नालों की विधिवत होनी चाहिए सफाई, शहर को जलभराव से मिले मुक्ति,-- रिपोर्ट में कोई सुधार नहीं,
- निगम के आय और व्यय की ऑडिट रिपोर्ट, --- आडिटर बगैर रिपोर्ट शून्य,
- शुल्क और प्रयोक्ता प्रभारों से किराया तथा अन्य आंतरिक राजस्व स्रोतों के अंशदान से राजस्व कार्य में हो प्रगति। --- रिपोर्ट में कोई सुधार नहीं,
- 2011 की जनगणना के आधार पर हर घर में हो शौचालय, --- रिपोर्ट खराब,
- अमृत योजना के तहत शहर के पार्कों का हो सौंदर्यीकरण, -- रिपोर्ट खराब,
ये थे अफसरों के वादे
- शहर स्वच्छ बनाने को घर-घर में डस्टबिन रखवाए जाएंगे,
- प्रतिदिन घर-घर से कूड़ा उठवाने की व्यवस्था शुरू करने,
- योजना को पांच जून पर्यावरण दिवस से शुरू कराने,
- फेल होने पर एक जुलाई से व्यवस्था शुरू कराने,
- शहर को स्वच्छ बनाने को जनता का सहयोग लेने,
- उम्मीद तो पूरी है कि एक जुलाई से डस्टबिन बांटे जाएंगे और डोर टू डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था शुरू होगी। नगरायुक्त बाहर हैं। उनके आने के बाद कंपनी के लोगों के साथ बैठक करके व्यवस्था शुरू कराने का प्रयास करेेंगे। डस्टबिन के रेट को लेकर कुछ चल रहा है। रही बात घर-घर में शौचालय की अभी शहर में लगभग 30 हजार परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। इनका मल नालियों में बहता है। शौचालय न होने से नुकसान और फायदे बताए बताकर जनता को शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
डा. कुंवरसेन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।