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पट्टे की पैमाइश के लिए चेयरमैन ने खडे़ किए हाथ

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पट्टे की पैमाइश के लिए चेयरमैन ने हाथ खडे़ किए
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फलावदा। नगर पंचायत एवं मत्स्य पालक के बीच चल रही मुकदमेबाजी में स्टे के बावजूद तालाब में स्थित पट्टे की भूमि पर कब्जा दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। 1975 में आवंटित कृषि भूमि के पट्टे पर 44 वर्ष बाद भी धारक को कब्जा नहीं मिल पाया है।
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गौरतलब है कि मवाना थाना अंतर्गत गांव मटौरा निवासी कलावती के नाम खतौली मार्ग पर कृषि भूमि के पट्टे का आवंटन हुआ था। यह भूमि तालाब के पास होने के कारण कई दशक पूर्व तालाब में समायोजित हो गई थी। पट्टे की भूमि पर वर्षों पूर्व नगर पंचायत द्वारा रास्ते का निर्माण कराया गया था। तालाब के बीच में इस पट्टे की भूमि पर ही मोहल्ला कानी पट्टी से सड़क चल रही है। कई दशकों बाद भी कलावती को आवंटित हुए पट्टे पर कब्जा नहीं मिल सका है। अब 44 वर्ष बाद इस पट्टे पर कब्जे की कवायद शुरू हुई है। पट्टा धारक कलावती की ओर से पट्टे की निशानदेही की मांग की गई है। एसडीएम के निर्देश पर राजस्व की टीम फलावदा पहुंच गई। टीम ने नगर पंचायत से कर्मचारियों की मदद मांगी, लेकिन चेयरमैन अब्दुस समद ने कृषि भूमि के पट्टे के कब्जे के मामले में मदद से हाथ खड़े कर दिए। टीम मौके का जायजा लेकर लौट गई। बताया कि नगर पंचायत द्वारा तालाब को मत्स्य पालन हेतु ठेके पर दे रखा है। उक्त तालाब का विगत दिनों तत्कालीन अधिशासी अधिकारी पवित्रा त्रिपाठी द्वारा ठेका निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर ठेकेदार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब कोर्ट से तालाब की भूमि पर स्टे चल रहा है। कमीशन ने तालाब की भूमि को लेकर अपनी रिपोर्ट दी है। रास्ता बनने के बाद पट्टे की भूमि का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। हालांकि अभिलेखों में जरूर कलावती का पट्टा दर्ज है। बताया जा रहा है रास्ते और तालाब में गायब हुई भूमि वापस लेने के लिए पट्टे धारक को सेटिंग करके मुख्य मार्ग पर भूमि नापने के प्रयास हो रहे हैं।
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उधर, नगर पंचायत चेयरमैन अब्दुस समद का कहना है कि तालाब को मत्स्य पालन के लिए ठेके पर दे रखा है पट्टे की उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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