सरकारी अस्पतालों का हाल...बदहाल
मेडिकल इमरजेंसी में 80 प्रतिशत मॉनिटर खराब
मेडिकल कैसे बनेगा एम्स जैसा, इमरजेंसी के मॉनिटर तक खराब पड़े हैं
- कोई नहीं ले रहा सुध, दावे बड़े-बड़े, हकीकत में हवा
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। सरकार द्वारा लोगों को सुलभ इलाज का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि जिले के सरकारी अस्पतालों का हाल बदहाल है। मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी के80 प्रतिशत मॉनिटर छह माह से ज्यादा समय से खराब पड़े हैं। वहीं, जिला अस्पताल में मरीजों के बीच कुत्ते घूम रहे हैं। इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। यह हालात तब हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है। चिकित्सकों और कर्मचारियों को मोटी तनख्वाह मिलती है।
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती मरीजों की मॉनिटरिंग के लिए लगे मॉनिटर ठप पड़े हैं। ऐसे में न तो यह पता चल पा रहा है कि हार्ट रेट कितना है, ऑक्सीजन सेचुरेशन और टेंपरेचर कितना है। ब्लड प्रेशर भी लगातार पता नहीं चल रहा है। इमरजेंसी में 15 मॉनिटर लगे हैं इनमें से 12 ठप पड़े हैं। यह हाल उस मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी का है, जिसके लिए कई बार दावा किया जा चुका है कि इसे ‘एम्स’ जैसा बनाया जाएगा। इस संबंध में प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता का कहना है कि मॉनिटर सही कराने के लिए शासन को लिखा जा चुका है। जल्द ही इन्हें सही करा लिया जाएगा।
जिला अस्पताल में मरीजों के बीच आराम फरमा रहे कुत्ते
जिला अस्पताल में ओपीडी, पर्चा काउंटर और परिसर में आवारा कुत्तों का डेरा है। आवारा कुत्ते मरीजों के बीच घूमते रहते हैं। यह हालात व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। जहां लोग रेबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए आते हैं, वहीं पर उन्हें आवारा कुत्तों से रूबरू होना पड़ता है। आवारा कुत्तों को अस्पताल परिसर में रोकने के लिए नगर निगम और वन विभाग से मदद मांगी थी। एक बार नगर निगम ने आवारा कुत्तों को पकड़ा भी था, लेकिन पशु क्रूरता अधिनियम के कारण कार्रवाई नहीं की थी। इन्हें भगाने के लिए अस्पताल में वार्ड ब्वॉय को लाठी दी गई थी, पर समाधान नहीं हुआ है। लिहाजा अस्पताल परिसर आवारा कुत्तों का अड्डा बना हुआ है। इन्हें यहां से हटाने की कोई जहमत नहीं उठा रहा है। इस संबंध में जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल का कहना है कि कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर निगम से सपंर्क किया था, लेकिन एनिमल केयर सोसाइटी ने इसका विरोध किया था, जिस कारण नगर निगम ने कार्रवाई नहीं की थी।