आइये ‘धरोहर’ जानिए सेना और मेरठ का इतिहास
दीपक भारद्वाज
मेरठ। क्रांतिधरा मेरठ के शहरवासियों को सेना और अपने शहर का इतिहास जानने के लिए अब इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। सेना की पाइन डिव द्वारा बनाए गए ‘धरोहर’ सेना जागरुकता केंद्र को आम लोगों और स्कूली बच्चों के लिए खोल दिया गया है। जिससे आप आसानी से यहां पहुंचकर सेना और मेरठ के इतिहास को जान सकेंगे। हाल ही में चार मई को सेना के इस जागरुकता केंद्र का उद्घाटन थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने किया था। शीशे वाला गुरुद्वारे के पास स्थित संग्रहालय पर सूचना बोर्ड लगाकर आम लोगों को जानकारी दी गई है।
सेना के जागरुकता केंद्र को तीन चरणों में बांटा गया है। पहले हॉल में मेरठ और कैंटोनमेंट का इतिहास दिखाया गया है। दूसरे हॉल में सेना में किस तरह से आप कॅरियर बना सकते हैं इसकी जानकारी देने के साथ ही सेना के झंडों को दिखाया गया है। इसके अलावा तीसरे और अंतिम हॉल में सेना के इतिहास और युद्घों के बारे में विस्तार से बताया गया है। युवा वर्ग को अधिक से अधिक अपनी सेना के बारे में जानने के लिए इस जागरुकता केंद्र की शुरुआत की गई है।
भारत-पाक के युद्व का सजीव चित्रण
सेना जागरुकता केंद्र में भारत-पाक 1965 और 1947-48 युद्घ को भी चित्रों के माध्यम से दिखाया गया है। इसके अलावा यहां 1971 की लड़ाई का चित्रण भी उपलब्ध है। वही, इसमें सेना के जवानों के स्टेच्यू भी बनाए गए हैं। जो कि स्कूली बच्चों को देशभक्ति का अहसास कराएंगे।
क्रांतिधरा का इतिहास भी जानें
मेरठ के इतिहास को भी इस ‘धरोहर’ में स्थान दिया गया है। यहां ‘टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ वॉल पर जम्बूद्वीप, 1822 का सेंट जोंस चर्च, बाबा औघड़नाथ मंदिर, दरगाह बाले मियां, शाहपीर मकबरा, गांधी बाग, जामा मस्जिद के फोटो के साथ इतिहास लिखा गया है। जिससे यहां आने वाले युवा इनके बारे में जान सकें। इसके अलावा डोगरा मंदिर, सिख रेजीमेंट गुरुद्वारा, गुरुद्वारा पंजाब रेजीमेंट, पाइन वार मेमोरियल का इतिहास भी दिखाया गया है।
‘धरोहर’ देखने की समय-सारिणी
इसे देखने के लिए सेना ने एक बार में अधिकतम 10-15 लोगों को प्रवेश की अनुमति दी है। सुबह की पाली में 10 से 12.30 और शाम के समय 4 बजे से 6.30 तक यह खुला रहेगा। इसे देखने के लिए पहचान पत्र लाना होगा। सेना के इस धरोहर को देखने के लिए 9476669844 पर संपर्क कर सकते हैं।