टूटी रेलिंग से न हो जाए हादसा, सड़क भी धंसी
सरधना। गंगनहर पटरी कांवड़ मार्ग की रेलिंग जगह-जगह से टूटी पड़ी हैं। टूटी हुई रेलिंग की जगह मिट्टी डाली गई हैं, लेकिन अब मिट्टी का कटान हो रहा है। इससे हर समय हादसे का डर बना रहता है। हाल ही में लगवाए गए हाइटगेज भी भारी वाहनों द्वारा तोड़ दिए गए। मंगलवार को एसडीएम ने कांवड़ मार्ग का निरीक्षण किया और अवर अभियंता गंगनहर के साथ ही पीडब्लूडी विभाग को पत्र लिखकर निर्देश दिए।
सरधना क्षेत्र में गंगनहर पटरी पर तमाम प्रयासों के बाद भी भारी वाहनों को पटरी पर दौड़ने से रोका जा सका है। वहीं गंगनहर में कोई वाहन अनियंत्रित होकर न समा जाए इसके लिए ईंटों की रेलिंग बनवाई गई थी, वह भी अब जगह-जगह से टूट चुकी हैं। सड़क पर भारी वाहनों के दौड़ने के कारण सड़क जगह-जगह से धंसने लगी हैं। कांवड़ यात्रा शुरू होने को है, लेकिन पटरी पर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए है। हाल ही में सलावा-सरधना-नानू व भोला झाल पर हाइट गेज लगवाए गये थे ताकि पटरी पर भारी वाहन न गुजर सके। भारी वाहन चालकों ने हाइट गेज को तोड़ दिया है, अब भारी वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। मंगलवार को एसडीएम अमित कुमार भारतीय ने पटरी का निरीक्षण किया। जिसमें कई जगह पर रेलिंग टूटी मिली और पटरी से मिट्टी का कटान मिला। एसडीएम ने इस संबंध में सिंचाई विभाग के अवर अभियंता व पीडब्लूडी विभाग को पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए कहा है।
कांवड़ यात्रा पास, टूटी पड़ी रेलिंग
जानीखुर्द। कांवड़ यात्रा को शुरू होने में करीब बीस दिन रह गए है, लेकिन कांवड़ मार्ग पर कोई भी तैयारी नहीं हो पाई है। इसे लेकर ग्रामीणों में रोष है। गंगनहर कांवड़ मार्ग से राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली के कांवड़ियां अपने शिवालयों को जाते है। शिवभक्त हरिद्वार से जल लेकर शिवरात्रि से करीब बीस दिन पहले निकलने शुरू हो जाते है, लेकिन अभी तक कांवड़ मार्ग पर कांवड़ियों के लिए कोई तैयारी नहीं की गई है। भोला झाल पर कांवड़ मार्ग के किनारे पर लगी लोहे की ग्रिल क्षतिग्रस्त हो गई है। कई जगह किनारे पर बनाई गई दीवार क्षतिग्रस्त हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल प्रशासन कांवड़ मार्ग पर पानी पीने की व्यवस्था के लिए सरकारी हैंडपंप लगवाने की घोषणा करता है, लेकिन यात्रा पूरी होते ही अधिकारी इस तरफ ध्यान तक नहीं देते।