रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने खोला मोर्चा
पकड़ेंगे पटल पर बैठे कर्मचारियों का भ्रष्टाचार
राजदीप जाखड़
मेरठ।
रोडवेज में संविदा चालकों-परिचालकों की ड्यूटी लगाने, मलाईदार रूट व अच्छी बस आवंटित करने के अलावा डब्ल्यूटी आदि के केस का निस्तारण कराने में कर्मचारियों द्वारा रिश्वत लेने का खुला खेल जगजाहिर है। अब विभाग में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद् उप्र खुलकर सामने आ गया है।
रोडवेज में लंबे समय से संविदा पर चालक और परिचालक भर्ती किए जा रहे हैं। वर्तमान में मेरठ रीजन में 1500 से ज्यादा संविदा चालक व परिचालक कार्यरत हैं। अधिकतर स्थायी परिचालक व चालक प्रमोशन पाकर बाबू बन गए हैं या अक्षमता के चलते रूट से हटकर ऑफिस से अटैच हो गए हैं। कार्यालयों में तैनात बाबुओं पर चालकों, परिचालकों को ड्यूटी पर लेने, मलाईदार रूटों पर भेजने और विदाउट टिकट (डब्ल्यूटी) मामलों का निपटारा करानेे आदि के लिए रिश्वत लेेने के आरोप लगते रहे हैं। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद् के मेरठ शाखा मंत्री सतेंद्र कुमार ने बताया कि संगठन की बैठक में निर्णय लिया गया है कि डिपो में यदि कोई कर्मचारी रिश्वत लेते या देते पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर व निलंबन की कार्रवाई कराने के लिए धरना दिया जाएगा। इस आशय का कार्यालय ज्ञापन जारी कर कर्मचारियों को चेता दिया है।
रिटायर कार्यालय अधीक्षक ने की थी भूख हड़ताल
तीन साल पहले रिटायर हुए कार्यालय अधीक्षक श्रीगोपाल शर्मा ने पेंशन स्वीकृत कराने की एवज में लेखाकार द्वारा 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने और एक वरिष्ठ लिपिक द्वारा फर्जी खेल प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रमोशन पाने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए आरएम कार्यालय पर भूख हड़ताल शुरू की थी। सूचना पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट ने मामलों की जांच कराने के आदेश पर भूख हड़ताल खत्म कराई थी।
आठ अधिकारियों की हो रही जांच
मेरठ रीजन में विदाउट टिकट के 950 दोषियों को बचाने के मामलों में आठ अधिकारी फंसे हैं। इन सभी की जांच चल रही है। अधिकारियों पर आरोप है कि रिश्वत लेकर डब्ल्यूटी के मामले न केवल निपटाए गए, बल्कि दोषी चालकों, परिचालकों को बाबू भी बना दिया। इनमें से कई रिटायर भी हो चुके हैं।
यह है आंकड़ा
मेरठ रीजन में कुल डिपो 05
कुल बस बेड़ा 923
संविदा चालक-परिचालक 1533
स्थायी कर्मचारी 550
मोर्चा खोलने की जानकारी नहीं
रिश्वत लेने और देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कर्मचारी संगठन द्वारा मोर्चा खोले जाने की मुझे जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो यह सही है। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। उनके संज्ञान में ऐसे मामले आएंगे तो वे कड़ी कार्रवाई करेंगे। -नीरज सक्सेना, आरएम मेरठ रीजन
रीजन की प्रतिदिन आय करीब 70 लाख