सरकारी सुस्ती की आड़ में अवैध निर्माण की बाढ़
मवाना। नगर समेत कई गांव को एमडीए की सीमा में शामिल करने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ है। इससे नक्शा पास करने में प्राप्त होने वाले राजस्व का घाटा हुआ। वहीं, एमडीए से होने वाले विकास कार्य भी अभी तक यहां नहीं कराए जा सके हैं।
बताते चलें कि साल 2017 में मवाना नगर समेत भैंसा, खेड़ी मनिहार, मुबारिकपुर, मवाना खुर्द आदि समेत अन्य गांवों को एमडीए की सीमा में शामिल किया गया था। इससे पहले तहसील के नियत प्राधिकारी यहां होने वाले निर्माण कार्य का नक्शा पास किया करते थे। जिससे सरकार को राजस्व प्राप्त होता था। हालांकि एमडीए में शामिल होने के बाद नियत प्राधिकारी से नक्शा स्वीकृत करने का हक छीन लिया गया था। पिछले दो साल से नगर एवं एमडीए में शामिल किए गए गांवों में बिना नक्शा पास किए मकानों एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों का निर्माण किया जा रहा है। जिस कारण सरकार को राजस्व का घाटा हो रहा है। वहीं, इसका फायदा उठाकर नगर में कई लोगों ने कॉलोनियां काटकर जमकर चांदी काटी। वर्तमान में भी कई कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। सवाल यह उठता है कि मास्टर प्लान तैयार होने के बाद जब इन कॉलोनियों पर एमडीए की नजर होगी। इन कॉलोनियों में मकान खरीदने वालों को काफी नुकसान रहेगा। शासन की हीलाहवाली के चलते इन कॉलोनियों में मकान लेने वाले लोग जो अपने भविष्य को संजोने का सपना देख रहे हैं वे परेशान रहेंगे। नगर निवासी संयुक्त व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष शैवाल दुबलिश का कहना है कि मास्टर प्लान तैयार नहीं होने से जहां नक्शा स्वीकृत नहीं हो पा रहे हैं वहीं सरकार को राजस्व का घाटा हो रहा है। इसके अतिरिक्त एमडीए द्वारा यहां किए जाने वाले विकास कार्यों पर भी ब्रेक लगा हुआ है। मुबारिकपुर के ग्राम प्रधान शौ सिंह का कहना है कि एमडीए का मास्टर प्लान तैयार होने से ग्रामीण क्षेत्र में भी विकास कार्य हो सकेंगे।
उपजिलाधिकारी अंकुर श्रीवास्तव का कहना है कि अगस्त 2017 क्षेत्र एमडीए की सीमा में शामिल हो जाने के बाद से नियत प्राधिकारी का पद समाप्त कर भवनों के नक्शे स्वीकृत करने का अधिकार भी समाप्त कर दिया गया था।