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बाल गृहों में रचनात्मक काम की व्यवस् था शून्य : डा. विशेष गुप्ता

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- उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग अध्यक्ष को मिली ढेरों खामियां
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- कहा, पूर्ण पारदर्शिता से होगा काम, संसाधनों को बेहतर बनाने की होगी कोशिश


मेरठ। उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता ने कहा कि बाल गृहों में रचनात्मक कार्य की व्यवस्था शून्य है। महज रहने की जगह और खाना उपलब्ध कराकर यहां रह रहे बच्चों का संपूर्ण विकास नहीं किया जा सकता। डॉ. गुप्ता शहर के बाल गृहों का निरीक्षण करने के बाद यहां सर्किट हाऊस में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने स्वीकार किया कि बाल गृहों में खामियों की भरमार है, जिन पर काम किया जाना बेहद जरूरी है। बाल गृहों में खामिया देखकर उन्होंने अधीक्षक कुलदीप सिंह को जमकर फटकार लगाई।
उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि बाल गृहों में बच्चों की मनोदशा को पढ़ने वाला कोई नहीं है। यहां जरूरत है बच्चों की सामाजिक परिस्थिति को जानते हुए उनमें बदलाव लाने वाली व्यवस्था तैयार करने की। उन्होंने कहा कि यहां अभी भी अतिरिक्त व्यवस्था की दरकार है। सुरक्षा के लिहाज बाल गृहों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। बच्चों के व्यक्तिगत विकास के लिए मजबूत खाका तैयार होगा। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण पर काम कर रही सभी संस्थाओं को पंजीकरण कराना होगा। बिना पंजीकरण वाली संस्था रद्द होंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर संस्थाओं का निरीक्षण भी किया जा रहा है।
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बाल गृहों में संविदा से बनेगी व्यवस्था
बाल गृहों में स्टाफ की कमी पर डॉ. विशेष गुप्ता ने कहा कि जनपदों में जिला बार समीक्षा इकाई गठित हैं। इन इकाईयों में अस्थाई नियुक्तियां की गई हैं। स्टाफ की कमी है तो बाल गृहों में भी इस व्यवस्था पर काम किया जा सकता है। लेकिन यह तब ही संभव है, जब यहां की हर जरूरत को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने का काम होगा। पूर्व सरकार के कार्यकाल में घटनाएं छिपाने का काम हुआ है। निचले स्तर पर यह काम किया गया। यही वजह है कि आज सरकार के पास पिछली किसी घटना का विवरण नहीं है।
मानसिक रूप से विकसित नहीं हुए बच्चे
बाल गृहों से बच्चों के भागने से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यहां बाहरी सुरक्षा व्यवस्था पर काम किया जा रहा है। बच्चों का मानसिक विकास कैसे हो, इस पर काम किया जाना जरूरी है। शहर में ऐसी काफी संस्थाएं हैं जो आगे आकर इसमें मदद कर सकती है। शहर में मनोवैज्ञानिक भी हैं और सामाजिक संस्थाएं भी, लेकिन जब तक उनसे संपर्क नहीं होगा, वह कैसे बाल गृहों का रूख करेंगे?
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खामियों की रिपोर्ट सौंपी जाएगी सरकार को
बाल गृह से बच्चों के फरार होने के मामले में उन्होंने कड़ा रूख दिखाया। उन्होंने कहा कि जेजे एक्ट की पहरेदारी उनका दायित्व है। वह इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट सरकार का सौंपेंगे। अभी तक जो भी कार्रवाई हुई है, वह रिपोर्ट के आधार पर हुई है। यह बात तय है कि बाल गृहों में बड़े स्तर पर लापरवाही हुई है, जिस कारण यहां रहने वाले बच्चे भागने का प्रयास करते हैं।
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