प्राइवेट कंपनी करेगी शहर के 40 वार्डों के नालों और सड़कों की सफाई
मेरठ। मैकेनाइज स्वीपिंग के लिए चयनित शहरों में मेरठ का नाम भी शामिल है। इसके तहत महानगर के मुख्य मार्ग और उससे सटे सभी वार्डों के नाले और सड़कों की सफाई की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनी को दी जाने की तैयारी है। नगर निगम प्रशासन ने ऐसे सभी वार्डों के नक्शे संजोने शुरू कर दिए हैं। साथ ही सफाई इंस्पेक्टरों को ऐसे वार्डों की जनसंख्या, नाले, सड़क आदि पर पूरी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश जारी कर किए हैं।
स्वच्छता भारत मिशन के तहत शहर की सफाई को लेकर प्लान तैयार किया जा रहा है। पूर्व में हर बार मेरठ गंदे शहरों में शामिल रहा है, लेकिन इस बार निगम प्रशासन ने पहले से ही स्वच्छता पर तैयारी शुरू कर दी हैं। मैकेनाइज स्वीपिंग के तहत शहर के मुख्य मार्ग जैसे दिल्ली रोड, हापुड़ रोड, मवाना रोड़, रुड़की रोड, सरधना रोड, बागपत रोड़, गढ़ रोड, किला रोड आदि सभी मुख्य मार्ग और इनसे सटे लगभग 40 वार्डों में नाला व सड़क सफाई विशेष स्तर पर कराने की तैयारी है। निगम प्रशासन का मानना है कि बाहर से आने वाला कोई भी व्यक्ति या अधिकारी शहर के मुख्य मार्गों से ही गुजरता है। इसलिए मुख्य मार्गों और उससे सटे वार्डों की सफाई को प्राथमिकता से लिया जाना चाहिए।
90 वार्डों में बंटा है शहर
शहर 90 वार्डों में बंटा है। सभी वार्डों की सफाई के लिए नगर निगम ने 2400 आउट सोर्सिंग और 900 स्थाई सफाई कर्मचारियों को लगाया है। जनसंख्या के आधार पर तैनात सफाई कर्मचारी शहर की सफाई के लिए पर्याप्त हैं। इन सभी सफाई कर्मचारियों का कार्य केवल सड़कों की सफाई करने और कूड़ा उठाने का है। नाला सफाई अब मशीनों से की जाती है।
प्रतिमाह तीन करोड़ अधिक वेतन पर खर्च
- नगर निगम के सफाई कर्मचारियों के वेतन पर तीन करोड़ से अधिक रुपये प्रतिमाह खर्च हो रहे हैं। इसके अलावा कूड़ा गाड़ी के चालक, परिचालक, कूड़ा गाड़ी का डीजल, नाला सफाई करने वाले वाहन और मशीनों के डीजल पर प्रतिमाह पांच करोड़ से भी अधिक राशि खर्च हो रही है। इसका पूरा भुगतान नगर निगम बोर्ड फंड से किया जाता है।
दायरे में 40 वार्ड
मैकेनाइज स्वीपिंग के लिए मेरठ का भी चयन हुआ है। इसके तहत शहर के सभी मुख्य मार्ग और सटे सभी वार्डों की सफाई की जिम्मेदारी कंपनी को दी जाएगी। फिलहाल इसके दायरे में 40 वार्ड आ रहे हैं। सभी का डाटा तैयार किया जा रहा है। इस व्यवस्था से मुख्य मार्गों पर कहीं गंदगी नजर नहीं आएगी। - मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त।