समय सीमा बढ़ने के बाद भी गेहूं खरीद नहीं हुई
खरखौदा। इस वर्ष बाजार में गेहूं का मूल्य अधिक होने के कारण क्रय केंद्रों पर लक्ष्य के अनुरूप गेहूं खरीद नहीं की गई। जिस कारण लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार ने 15 जून को क्रय केंद्रों को बंद न कर 25 तक चलाने का आदेश जारी किया। जिले में एफसीआई के क्रय केंद्र तो खुले हैं, लेकिन गेहूं खरीद नहीं की जा रही है। जिसकी वजह केंद्र सरकार से आदेश नहीं मिलना बताया जा रहा है।
पूरे जिले में उत्तर प्रदेश सहकारी संघ, सहकारी संघ, भारतीय खाद्य निगम, यूपी एग्रो व खाद्य विभाग द्वारा केंद्र खोलकर गेहूं खरीद की जा रही है। इन केंद्रों पर एक अप्रैल से 15 जून तक गेहूं खरीदारी की जानी थी। इस वर्ष केंद्रों पर गेहूं का समर्थन मूल्य 1840 रुपये प्रति कुंतल रखा गया। इसके बावजूद खरीद लक्ष्य के मुकाबले कम रहीं। इसके बाद भी केंद्रों पर गेहूं नहीं पहुंच सका। जिस कारण कोई भी समिति अपने लक्ष्य के अनुरूप गेहूं खरीद नहीं कर सकी। गेहूं केंद्रों तक नहीं पहुंचने के कई कारण भी रहे। जिसमें सबसे क्षेत्र में हर वर्ष के मुकाबले गेहूं का कम रकबा रहा। जिस कारण गेहूं की फसल तैयार करने से लेकर थ्रेसिंग तक खर्च अधिक होने लगा। गेहूं की फसल अधिक मुनाफे की नहीं रही। वहीं, गेहूं की फसल की कटाई के लिए मजदूर न मिलने के कारण किसानों ने गेहूं के रकबे को कम कर दिया। दूसरा बाजार भाव। मंडियों में गेहूं का मूल्य सरकारी मूल्य से अधिक मिल रहा है। जिस कारण इन केंद्रों पर तो केवल वहीं किसान अपना गेहूं बेचनेे जा रहा है। जिसने समितियों से लोन लिया हो या केंद्र प्रभारी की किसानों में अच्छी पकड़ रही हो। किसानों का गेहूं क्रय केंद्र तक न पहुंच पाने के कारण कोई समिति अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाईं। पहले क्रय केंद्र 15 जून तक चलाये जाने थे लेकिन लक्ष्य पूरा न होने के कारण प्रदेश सरकर ने दस दिन और बढ़ा दिये। अब 25 जून तक गेहूं खरीदा जाना है। जिसमें भारतीय खाद्य निगम को छोड़कर सभी समितियों के क्रय केंद्र गेहूं खरीद रहे हैं। भारतीय खाद्य निगम के पूरे जिले में चल रहे पांच केंद्रों खोले हैं, लेकिन इन पर गेहूं खरीद नहीं हो पा रही है। जिसकी वजह आदेश नहीं मिलना बताया जा रहा है।